कासारखेड़ा ग्राम पंचायत दस्तावेज़ हेराफेरी मामला, दोषियों के साथ अधिकारियों पर भी कार्रवाई की मांग तेज
कासारखेड़ा ग्रापं में सरकारी दस्तावेजों में हेराफेरी के चलते पूर्व सरपंच और उपसरपंच को अयोग्य घोषित कर दिया गया है। अब उन्हें बचाने वाले अधिकारियों पर भी कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।
Kasarkheda Gram Panchayat: धामणगांव रेलवे कासारखेड़ा ग्राम पंचायत में सरकारी दस्तावेजों में कथित हेराफेरी का मामला अब गंभीर राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद बन गया है। इस प्रकरण में पूर्व सरपंच और उपसरपंच को अयोग्य घोषित किए जाने के बाद अब उन्हें बचाने वाले अधिकारियों पर भी कार्रवाई की मांग जोर पकड़ रही है।
शिकायतकर्ता नितीन मेंढुले ने आरोप लगाया है कि संबंधित अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध रही है और उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाना चाहिए। इस संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री और विभागीय आयुक्त को विस्तृत शिकायत भेजी है।
क्या है पूरा मामला
बताया गया है कि 26 नवंबर 2021 को ग्राम पंचायत की मासिक बैठक के दौरान तत्कालीन सरपंच और उपसरपंच ने सचिव के पास से सरकारी इतिवृत्त (मिनट्स) रजिस्टर छीन लिया था। आरोप है कि बाद में उसमें अपने हस्ताक्षरों से अवैध ठराव दर्ज कर प्रशासन को गुमराह किया गया। इस मामले को लेकर नितीन मेंढुले ने मंत्रालय स्तर तक लगातार प्रयास किया, जिसके बाद ग्राम विकास मंत्री द्वारा दोनों जनप्रतिनिधियों को अयोग्य घोषित कर दिया गया
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अधिकारियों पर भी उठे सवाल
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि तत्कालीन गटविकास अधिकारी माया वानखड़े को नवंबर 2021 में शिकायत मिलने के बावजूद लगभग दो वर्षों तक कोई ठोस जांच नहीं की गई। मेंढुले के अनुसार यह कर्तव्य में लापरवाही और सबूत दबाने का मामला है, जिसके चलते संबंधित अधिकारी पर भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई होनी चाहिए।
6 साल तक चुनाव लड़ने पर रोक
ग्राम विकास विभाग के नियमों के अनुसार, भ्रष्टाचार या गंभीर गैरवर्तन के मामलों में अयोग्य घोषित व्यक्ति को अगले 6 वर्षों तक किसी भी चुनाव में भाग लेने की अनुमति नहीं होती। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि दोनों पूर्व पदाधिकारियों के नाम चुनावी रिकॉर्ड में अयोग्य के रूप में दर्ज किए जाएं।
अधिकारियों को भी बन सकते हैं सह-आरोपी कानूनी प्रावधानों के अनुसार, यदि दस्तावेज़ों में हेराफेरी जैसे मामलों में 30 दिनों के भीतर एफआईआर दर्ज नहीं की जाती है, तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों को भी उच्च न्यायालय में सह-आरोपी बनाया जा सकता है।
बढ़ी राजनीतिक हलचल
इस पूरे घटनाक्रम से स्थानीय राजनीति और प्रशासनिक तंत्र में हड़कंप मचा हुआ है। अब सभी की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है, खासकर इस बात पर कि क्या दोषियों के साथ-साथ लापरवाह अधिकारियों पर भी कानूनी शिकंजा कसा जाएगा।
