भंडारा में 3,746 विशेष आवश्यकता वाले छात्र, 18 साल के बाद क्या होगा भविष्य? उठे सवाल
Special Needs Students Bhandara: भंडारा में 3,746 विशेष आवश्यकता वाले छात्र हैं। 18 साल के बाद उनका भविष्य अनिश्चित, समाज कल्याण विभाग के पास स्वावलंबन का कोई रिकॉर्ड नहीं।
- Written By: प्रिया जैस
बौद्धिक अक्षमता छात्र (AI Generated Photo)
Autistic students support: जहां दुनिया भर में बौद्धिक अक्षमता से पीड़ित व्यक्तियों के अधिकारों और उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा में लाने के लिए विभिन्न पहलें की जा रही हैं, वहीं भंडारा जिले में विशेष जरूरतों वाले छात्रों की वास्तविक स्थिति सामने आई है। समग्र शिक्षा अभियान के तहत ‘समावेशी शिक्षा’ कार्यक्रम इन छात्रों की शिक्षा पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, लेकिन 18 वर्ष की आयु के बाद उनके भविष्य पर अनिश्चितता के बादल छाए हुए हैं।
जिले में गतिमंद श्रेणी के छात्रों की संख्या अधिक होने के बावजूद सबसे गंभीर मुद्दा यह है कि 18 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद कितने छात्र व्यावसायिक प्रशिक्षण लेते हैं और वास्तव में स्वावलंबी बनते हैं, इसका कोई रिकॉर्ड समाज कल्याण विभाग के पास उपलब्ध नहीं है। यू-डाइस 2024-25 के आंकड़ों के अनुसार, भंडारा जिले के सरकारी और अनुदानित स्कूलों में कुल 3746 विशेष आवश्यकता वाले छात्र नामांकित हैं।
अक्षमता का प्रकार छात्रों की संख्या
| श्रेणी / विवरण | छात्र संख्या |
|---|---|
| गतिमंद (बौद्धिक अक्षमता) श्रेणी – कुल | 1,214 |
| ➤ सीधी बौद्धिक अक्षमता | 890 |
| ➤ सेरेब्रल पाल्सी | 123 |
| ➤ विशिष्ट अध्ययन अक्षमता | 184 |
| ➤ ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर | 13 |
| ➤ बहु-अक्षमता | 4 |
| अन्य अक्षमता वाले छात्र (श्रवणदोष, चलनवलन अक्षमता, अल्पदृष्टि आदि) | 2,532 |
विशेष विद्यालयों की स्थिति और अनुदान
जिले में गतिमंद बच्चों के लिए कुल 9 मतिमंद विद्यालय संचालित हैं।इनमें से 5 विद्यालय अनुदानित हैं, जिनमें जनचेतना मतिमंद निवासी विद्यालय (भंडारा) और ज्ञानगंगा अनिवासी मतिमंद शाला (तुमसर) प्रमुख हैं। अनुदानित निवासी विद्यालयों को एक छात्र के निवास और भोजन के लिए प्रति माह 1650 रुपये का अनुदान मिलता है। हालांकि, 4 गैर-अनुदानित विद्यालय प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं। इन स्कूलों में छात्रों को बुनियादी सुविधाएं और प्रशिक्षण मिल पाता है या नहीं, यह चिंता का विषय बना हुआ है।
सम्बंधित ख़बरें
‘सनातन और हिंदू धर्म अलग हैं’, सीएम योगी के बयान पर कांग्रेस नेता हुसैन दलवाई का तीखा पलटवार
Kandivali Property Fraud: बिना मालिक की अनुमति बेचा फ्लैट, महिला शिक्षिका से धोखाधड़ी का मामला उजागर
Nerul Wetland Expansion: नेरुल DPS झील वेटलैंड विस्तार अंतिम चरण में, फ्लेमिंगो संरक्षण को मिलेगा बड़ा सहारा
Kharghar Dumper Accident: खारघर में तेज रफ्तार डंपर ने वकील को कुचला, मौत के बाद सड़क जाम
18 वर्ष के बाद क्या? भविष्य अनसुलझा
- गतिमंद बच्चे 18 वर्ष की आयु तक इन विशेष स्कूलों में शिक्षा लेते हैं, जिसमें अंतिम चरण प्री-वोकेशनल (16 से 18 वर्ष) समूह होता है, जहां उन्हें रोजगार और व्यवसाय-पूर्व प्रशिक्षण दिया जाता है।
- 18 वर्ष के बाद, हालांकि व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यशालाएं (जैसे तुमसर में लुम्बिनी मतिमंद व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यशाला) उपलब्ध हैं, लेकिन यह सबसे बड़ी विडंबना है कि प्रशिक्षण के बाद कितने छात्र स्वावलंबी हुए, यह जानने के लिए समाज कल्याण विभाग के पास कोई डेटाबेस ही नहीं है।
यह भी पढ़ें – पहले कैंसिलेशन अनाउंस हुआ, फिर आई फ्लाइट…नागपुर एयरपोर्ट में मची अफरा-तफरी, IndiGo पर भड़के यात्री
- नतीजतन, कई वर्षों की शिक्षा के बाद ये छात्र वर्तमान में क्या कर रहे हैं और उनका सामाजिक पुनर्वास कैसे हो रहा है, यह प्रश्न अनुत्तरित बना हुआ है।
- विश्व मतिमंद दिवस के अवसर पर, यह आवश्यक है कि सरकारी तंत्र केवल शिक्षा पर ही नहीं, बल्कि 18 वर्ष से अधिक आयु के इन छात्रों के कौशल विकास, रोजगार और सामाजिक पुनर्वास पर तत्काल ध्यान केंद्रित करे और उनकी प्रगति का निश्चित और अद्यतन डेटा रखना शुरू करे।
