Sakoli gas supply (सोर्सः सोशल मीडिया)
Bhandara Sericulture News: भंडारा जिले में 52 एकड़ में शहतूत की खेती से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नया बल मिल रहा है। राज्य में रेशम खेती के महत्व को बढ़ावा देने के लिए चलाए गए महारेशीम अभियान 2025 को जिले में अच्छा प्रतिसाद मिला है।
9 जनवरी से 9 फरवरी 2025 के बीच इस अभियान के दौरान जिले के सात तहसीलों के 44 नए किसानों ने शहतूत की खेती के लिए पंजीकरण कराया। वर्तमान में, जिले में कुल 52 एकड़ क्षेत्र में शहतूत की खेती हो रही है, जिससे रेशम उत्पादन को नई दिशा मिल रही है।
भंडारा जिला टसर रेशम उद्योग के लिए पारंपरिक रूप से जाना जाता है। यहां जिला रेशम कार्यालय की स्थापना 21 मई 2007 को की गई थी। यह जिला रेशम कोकून उत्पादन से लेकर धागा और कपड़ा निर्माण तक की पूरी प्रक्रिया संचालित करता है।
जिले में टसर कीट पालन के साथ-साथ 2016 से शहतूत रेशम उद्योग को प्रायोगिक तौर पर शुरू किया गया है। शहतूत रेशम में वर्तमान में 52 एकड़ क्षेत्र में खेती हो रही है, जिससे साल 2024-25 में 3,028 किलो और 2025-26 में 764 किलो कोकून का उत्पादन हुआ है।
अल्पभूधारक और अनुसूचित जाति/जनजाति के किसानों के लिए मनरेगा योजना काफी मददगार साबित हो रही है। एक एकड़ शहतूत खेती और कीट पालन के लिए तीन वर्षों में 4,32,240 रुपये तक का अनुदान दिया जाता है, जिससे किसानों को आर्थिक सहायता मिल रही है।