भंडारा में 72 करोड़ जुर्माना बकाया कंपनी को फिर मिला रेत घाट ठेका, जनप्रतिनिधियों का विरोध

Bhandara Sand Mining: भंडारा में 72 करोड़ रुपये का जुर्माना बकाया होने के बावजूद डिफॉल्टर कंपनी को दोबारा रेत घाट का ठेका मिलने पर विवाद गहरा गया।
bhandara sand ghat allocation 72 crore defaulter company controversy
भंडारा रेत घाट विवाद- फाइल फोटो (सोर्सः सोशल मीडिया)
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Bhandara Sand Ghat Controversy: भंडारा जिले में रेत घाटों के आवंटन को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। जिला खनिज प्रतिष्ठान की नियामक बैठक में जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि नियमों को ताक पर रखकर 72 करोड़ रुपये का भारी जुर्माना न चुकाने वाली एक डिफॉल्टर कंपनी को दोबारा रेत घाट का ठेका दे दिया गया। इस मुद्दे के सामने आते ही बैठक में मौजूद जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए।

मामले ने जिले के राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है तथा पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। जिला खनिज प्रतिष्ठान की नियामक बैठक में उठा मुद्दा जिला खनिज प्रतिष्ठान की नियामक बैठक के दौरान सांसद डॉ। प्रशांत पडोले ने सबसे पहले यह मुद्दा उठाया और प्रशासन से जवाब मांगा।

72 करोड़ जुर्माना नहीं चुकाने वाली कंपनी को दोबारा ठेका

इसके बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं विधायक नाना पटोले, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजीत पवार गुट) के विधायक राजू कारेमोरे, शिवसेना (शिंदे गुट) के विधायक नरेंद्र भोंडेकर तथा भाजपा विधायक अविनाश ब्राह्मणकर ने भी एक स्वर में इस निर्णय का विरोध किया। जनप्रतिनिधियों का कहना था कि जिस एजेंसी पर पहले से करोड़ों रुपये का जुर्माना बकाया है, उसे दोबारा ठेका देना प्रशासनिक पारदर्शिता और नियमों पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

अब तक नहीं चुकाई गई जुर्माना राशि

बैठक में जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि संबंधित एजेंसी पर पूर्व में नियमों के उल्लंघन के कारण 72 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया था। इसके बावजूद न तो जुर्माने की राशि की वसूली की गई और न ही एजेंसी के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की गई। उलटे उसी एजेंसी को दोबारा रेत घाटों का ठेका सौंप दिया गया। जनप्रतिनिधियों ने इसे प्रशासनिक लापरवाही और संभावित मिलीभगत का मामला बताते हुए इसकी उच्चस्तरीय जांच की मांग की।

जनप्रतिनिधियों ने कलेक्टर को सौंपा संयुक्त ज्ञापन

बैठक के बाद सभी दलों के जनप्रतिनिधियों ने जिला कलेक्टर सावन कुमार को संयुक्त ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में संबंधित एजेंसी की जमा सुरक्षा राशि तत्काल जब्त करने, बकाया 72 करोड़ रुपये के जुर्माने की वसूली करने, रेत उत्खनन का लाइसेंस रद्द करने, कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने तथा संबंधित कंपनी और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है। जनप्रतिनिधियों ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने समय रहते कठोर कार्रवाई नहीं की, तो जिलेभर में व्यापक जनआंदोलन किया जाएगा।

जिला खनिकर्म अधिकारी ने नहीं दिया स्पष्ट जवाब

मामले को लेकर जब जिला खनिकर्म अधिकारी सचिन वाढवे से पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो उन्होंने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। जनप्रतिनिधियों ने अधिकारियों की इस चुप्पी पर भी सवाल उठाए और कहा कि यदि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रही है तो प्रशासन को सभी तथ्यों को सार्वजनिक करना बाहिए, उनका कहना था कि जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होना भी उतना ही आवश्यक है जितना संबंधित एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई।

15 लाख ब्रास रेत उत्खनन का आरोप

बैठक के दौरान विधायक राजू कारेमोरे ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि संबंधित एजेंसी ने नियमों के विरुद्ध लगभग 15 लाख ब्रास रेत का अवैध उत्खनन किया है। उनके अनुसार इस रेत का अनुमानित बाजार मूल्य करीब 700 करोड़ रुपये है। उन्होंने आरोप लगाया कि इतने बड़े पैमाने पर सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने और पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन करने के बावजूद एजेंसी के खिलाफ कठोर कार्रवाई नहीं होना कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने यह भी कहा कि पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

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