बिना अनुमति JCB से खेती तहस-नहस, भंडारा में RVR प्रोजेक्ट कंपनी के खिलाफ किसानों का फूटा गुस्सा
RVR Project private limited Bhandara news: भंडारा में RVR प्रोजेक्ट कंपनी ने बिना अनुमति किसानों के खेतों में चलाई जेसीबी। फसलें बर्बाद, ग्रामीणों ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी।
- Written By: प्रिया जैस
भंडारा ग्रामीण (सौजन्य-नवभारत)
Farmers Protest in Rohana Indurkha: भंडारा जिले के रोहना और इंदूरखा परिसर में आरवीआर प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड नामक निजी कंपनी की मनमानी के खिलाफ किसानों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। आरोप है कि कंपनी ने बिना किसी आधिकारिक अनुमति या पूर्व सूचना के सीधे किसानों की निजी जमीनों पर जेसीबी चलाकर समतलीकरण का काम शुरू कर दिया।
इस अवैध कार्रवाई के कारण खेत में खड़ी तुअर, गेहूं और चने की फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई हैं, जिससे किसानों को हजारों रुपयों का आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा है। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है। घटना के समय इंदूरखा के एक किसान के खेत में अचानक जेसीबी मशीन घुस गई।
नहीं ली कोई अनुमति
जब वहां फसलें जोरों पर थीं, तब मशीन की ओर से खुदाई और जमीन समतलीकरण का काम शुरू किया गया। जैसे ही ग्रामीणों को इसकी भनक लगी, बड़ी संख्या में किसान और ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। आक्रोशित ग्रामीणों ने तत्काल काम रुकवा दिया और कंपनी के प्रतिनिधियों को वहां से खदेड़ दिया।
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जांच में यह बात सामने आई है कि जेसीबी मालिक या आरवीआर प्रोजेक्ट कंपनी ने इस कार्य के लिए न तो जमीन मालिक से बात की और न ही ग्राम पंचायत, राजस्व विभाग या पुलिस प्रशासन से कोई लिखित अनुमति ली।
वर्तमान में चल रहा न्यायालयीन विवाद
स्थानीय किसानों ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा कि वर्ष 2011-12 में उन्होंने अपनी जमीन भंडारा थर्मल पावर प्राइवेट लिमिटेड को इस शर्त पर बेची थी कि परिवार के एक सदस्य को नौकरी दी जाएगी। लेकिन 15 साल बीत जाने के बाद भी न तो वहां कोई प्रोजेक्ट शुरू हुआ और न ही किसी को नौकरी मिली।
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उल्टा किसानों का आरोप है कि संबंधित कंपनी ने इस जमीन को बैंक में गिरवी रख दिया और बाद में इसे किसी दूसरी कंपनी को बेच दिया। इस पूरे लेन-देन की जानकारी जमीन मालिकों को नहीं दी गई, जबकि जमीन को लेकर वर्तमान में न्यायालयीन विवाद चल रहा है।
कंपनी पर मामला दर्ज करने की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन और कंपनी को कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि जब तक कोर्ट का अंतिम फैसला नहीं आता, तब तक इस जमीन पर किसी भी प्रकार का काम नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जोर-जबरदस्ती की गई तो वे 1994 के ऐतिहासिक संघर्ष की तरह स्वयं कार्रवाई करने को मजबूर होंगे।
किसानों ने मांग की है कि फसलों के नुकसान की तत्काल भरपाई की जाए, पुराने नौकरी के वादों को पूरा किया जाए और अवैध रूप से घुसपैठ करने वाली कंपनी पर मामला दर्ज किया जाए। घटना की जानकारी मिलते ही सामाजिक कार्यकर्ता और किसान संगठनों के पदाधिकारी भी समर्थन में उतर आए हैं और प्रशासन से पंचनामा कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
