

Bhandara Public Distribution System: गरीब परिवारों को सस्ता अनाज उपलब्ध कराने वाली सार्वजनिक वितरण व्यवस्था में भंडारा तहसील में गेहूं के स्थान पर मक्का दिए जाने का मामला सामने आया है। मक्का की रोटी यह भंडारा जिले के नागरिकों की थाली का हिस्सा नहीं है। आरोप है कि जुलाई के अंत में अगस्त, सितंबर और अक्टूबर, तीन महीनों का मक्का एक साथ लाभार्थियों को दिया गया। इससे बड़ी संख्या में परिवारों के सामने अनाज के उपयोग को लेकर परेशानी खड़ी हो गई है।
सामाजिक कार्यकर्ता सचिन फाले ने बताया कि भंडारा तहसील में करीब 170 राशन दुकानें, जबकि शहर में 36 दुकानें हैं। अंत्योदय योजना के करीब 11,900 तथा प्राथमिकता परिवार श्रेणी के करीब 42,137 कार्डधारक बताए जाते हैं। ऐसे में बड़ी संख्या में परिवारों को गेहूं के बजाय मक्का दिया गया, जानकारी के अनुसार जुलाई में भंडारा तहसील में करीब 22 हजार विवंटल चावल के साथ लगभग 22 हजार क्विंटल मक्का वितरित किया गया। अंत्योदय योजना के लाभार्थियों को भी बड़ी मात्रा में मक्का दिया गया। इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की जाए।
राशन लाभार्थी मंगेश मडावी ने कहा कि राशन में मिला मक्का दुकानदारों अथवा खुले बाजार में करीब 15 रुपए प्रति किलोग्राम की दर से बेचे जाने की जानकारी है। इससे सरकारी अनाज वितरण व्यवस्था की उपयोगिता और उद्देश्य पर सवाल खड़े हो रहे हैं। शिकायतों के बावजूद आपूर्ति विभाग द्वारा पर्याप्त कार्रवाई नहीं की जा रही है। कितनी मात्रा में मक्का खरीदा गया, किन आपूर्तिकर्ताओं से खरीद हुई और इसकी दर क्या थी यह बड़ा सवाल है। अनाज की खरीद, आपूर्ति, वितरण और शिकायतों की स्वतंत्र जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए।
खेतिहर मजदुर रामेश्वर इनवाते ने कहा कि सवाल यह है कि गेहूं, के स्थान पर मक्का देने का निर्णय किस स्तर पर लिया गया। कई गरीब परिवारों में मक्का नियमित भोजन का हिस्सा नहीं है। तीन महीनों का मक्का एक साथ देने की आवश्यकता क्यों पड़ी, गेहूं का वितरण क्यों रोका गया इसकी जांच की जाए। अनाज की गुणवत्ता, चावल और मक्का वितरण को लेकर परिवार में नाराजगी है। वर्षा ऋतु में मक्के के भंडारण और उपयोग को लेकर भी संभ्रम की स्थिति है। वितरित किया गया मक्का इतना पुराना है की उसमें बारिश के दिनों में फफूंद लग रही है।