30 रुपए के तेल की जगह ₹170 का पैकेट! खुले तेल पर सख्ती का सीधा असर, गरीब परिवारों का रसोई बजट बिगड़ा

Open Oil Sale Ban: खुले खाद्य तेल की बिक्री पर सख्ती से गरीब परिवारों का बजट बिगड़ गया है। 30-40 रुपये का तेल खरीदने वालों को अब 160-170 रुपये का पैकेट लेने की मजबूरी है।
Open Edible Oil Restrictions Impact
खुले तेल पर सख्ती से गरीबों का बजट बिगड़ाप्रतीकात्मक तस्वीर, सोर्स: AI
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Open Edible Oil Restrictions Impact: खाद्य तेल की खुले में बिक्री पर सख्ती का सीधा असर अब रोज कमाने खाने वाले गरीब और निम्न आय वर्ग के परिवारों पर दिखाई देने लगा है। खुले में अपनी जरूरत के अनुसार 30 से 40 रुपये का तेल खरीदकर काम चलाने वाले लोगों के सामने अब 160 से 170 रुपये तक का पैकेट खरीदने की मजबूरी खड़ी हो गई है। ऐसे में सीमित आमदनी में घर चलाने वाले परिवारों का बजट बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। गरीब परिवारों का कहना है कि उन्हें एक साथ बडी मात्रा में तेल खरीदने की आवश्यकता नहीं होती।

कई परिवार रोजाना या दो-तीन दिन की जरूरत के हिसाब से थोड़ी-थोड़ी मात्रा में तेल खरीदते हैं। पहले वे अपनी जेब और जरूरत के अनुसार 30, 40 या 50 रुपये का खुला तेल खरीद लेते थे लेकिन खुले तेल की बिक्री पर सख्ती होने के बाद दुकानदार अब पैकेट में ही तेल देने की बात कह रहे हैं। रोज कमाने-खाने वाले मजदूरों, घरेलू कामगारों, छोटे काम-धंधे करने वाले और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए एकमुश्त 160 से 170 रुपये खर्च करना आसान नहीं है।

खुले तेल पर सख्ती से गरीबों का बजट बिगड़ा

दिनभर की कमाई में से भोजन, किराया, बच्चों की पढ़ाई, गैस, बिजली और अन्य जरूरी खर्च निकालने के बाद रसोई का बजट पहले ही सीमित रहता है। ऐसे में जिन परिवारों को तत्काल केवल 30-40 रुपये के तेल की आवश्यकता होती है, उन्हें मजबूरी में कई गुना अधिक राशि का पैकेट खरीदना पड़

रहा है। इससे उनके दैनिक खर्च का संतुलन बिगड़ रहा है। खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता को लेकर खुले तेल की बिक्री पर कार्रवाई की जा रही है लेकिन गरीब उपभोक्ताओं का कहना है कि नियमों को लागू करते समय उनकी आर्थिक स्थिति को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। उनका कहना है कि मिलावटी तेल की बिक्री पर कार्रवाई होनी चाहिए लेकिन साथ ही जरूरतमंदों के लिए किफायती विकल्प भी उपलब्ध कराया जाना जरूरी है।

तेली समाज भी परेशान

  • इस सख्ती से तेली समाज भी काफी परेशान है जिसके लोग वर्षों से खुले तेल का ही व्यापार करते आ रहे हैं।

  • समाज ने सरकार से मांग की है कि इस तरह की सख्ती न करे बल्कि मिलावट करने वाली पर कार्रवाई करे।

Open Edible Oil Restrictions Impact
डिजिटल प्लेटफॉर्म से विद्युत उपभोक्ताओं को जागरूक कर रही योगी सरकार

सरकार से राहत की मांग

कई लोगों का कहना है कि हम रोज कमाते हैं और रोज घर चलाते हैं। एक साथ 160-170 रुपये का तेल खरीदना हमारे लिए मुश्किल है। पहले जितनी जरूरत होती थी उतना ही तेल खरीद लेते थे। अब छोटी जरूरत के लिए भी पूरा पैकेट लेना पड़ रहा है। गरीब और निम्न आय वर्ग के लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि खाद्य तेल की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता न हो लेकिन कार्रवाई के साथ गरीब उपभोक्ताओं की परेशानी का भी समाधान निकाला जाए।

लोगों का सुझाव है कि कम कीमत और छोटी मात्रा में मानक पैकिंग वाले खाद्य तेल उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाए, ताकि नियमों का पालन भी हो और गरीब परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी न पड़े। खुले तेल की बिक्री पर सख्ती का उद्देश्य निश्चित रूप से उपभोक्ताओं को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य तेल उपलब्ध कराना है लेकिन मौजूदा स्थिति में रोज कमाने-खाने वाले परिवारों के सामने खड़ी आर्थिक परेशानी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

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