इतिहास प्रेमियों में उत्साह, शोधकर्ताओं की नजर; 164 साल पुराने पुस्तकालय में ऐतिहासिक खोज

Bhandara Library: भंडारा के गांधी चौक सार्वजनिक पुस्तकालय में छत्रपति शिवाजी महाराज के काल का दुर्लभ सोने का सिक्का ‘होन’ मिला। 164 वर्षों में पहली बार ऐसी ऐतिहासिक धरोहर सामने आई है।
History lovers excited, researchers on the lookout; historical discovery in 164-year-old library
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
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Bhandara Maratha Currency: भंडारा जिले में वाचन संस्कृति की समृद्ध परंपरा को सहेजने वाले गांधी चौक स्थित सार्वजनिक पुस्तकालय में छत्रपति शिवाजी महाराज के काल का अत्यंत दुर्लभ सोने का सिक्का 'होन' प्राप्त हुआ है।

पुस्तकालय के 164 वर्षों के इतिहास में पहली बार यह ऐतिहासिक धरोहर सामने आने से शिवप्रेमियों और इतिहास शोधकर्ताओं के बीच भारी उत्साह का माहौल देखा जा रहा है। पुस्तकालय की तिजोरी में मिले इस सोने के सिक्के के एक ओर श्री राजा शिव अक्षर अंकित हैं, जबकि दूसरी ओर छत्रपति' शब्द खुदा हुआ है।

ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार, यह मुद्रा वर्ष 1674 में छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक के समय प्रचलन में आई थी। वर्तमान में उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अब तक महाराज के केवल छह होन ही प्राप्त हो सके हैं, जिनमें से एक राष्ट्रीय संग्रहालय नई दिल्ली और दूसरा मुंबई के प्रिंस ऑफ वेल्स म्यूजियम में संरक्षित है। भंडारा में मिले इस दुर्लभसिक्के का वजन 2.8490 ग्राम और व्यास 1.2 सेंटीमीटर है।

ऐसे खुला इतिहास का खजाना

पुस्तकालय की नई इमारत के शिल्पकार भाऊसाहेब दलाल ने पुरानी इमारत की एक प्राचीन तिजोरी को इस नई इमारत में स्थानांतरित किया था। कई वर्षों से इस तिजोरी की चाबियां गुम होने के कारण यह बंद पड़ी थी। कुछ महीनों पहले जिज्ञासावश नई चाबी बनवाकर जब इस तिजोरी को खोला गया, तब पुराने दस्तावेजों के खांचे में यह दुर्लभस्वर्ण मुद्रा मिली। यह ऐतिहासिक धरोहर पुस्तकालय के पास कब और किसके माध्यम से आई, इसका सटीक इतिहास फिलहाल स्पष्ट नहीं हो सका है।

पुरातत्व विभाग के शोध की प्रतीक्षा

भंडारा में मिली इस मुद्रा को इतिहास की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विदर्भ को एक सार्वजनिक संस्था तक यह धरोहर कैसे पहुंची, इस पर अब पुरातत्व विभाग के शोध के बाद ही विस्तृत प्रकाश पड़ने की संभावना है। फिलहाल इस ऐतिहासिक सिक्के को देखने के लिए पुस्तकालय में नागरिकों की भारी भीड़ उमड़ रही है।

दर्शन के लिए पुस्तकालय में रखा

पुस्तकालय की यह तिजोरी कई दशकों बाद जब खोली गई, तब यह शिवकालीन अमूल्य धरोहर हमारे हाथ लगी। शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक का यह प्रतीक हमारे पुस्तकालय के संग्रह में होना बेहद गर्व की बात है।

हमने पुरातत्व विभाग से इस सिक्के पर अधिक शोध और स्पष्टीकरण देने का अनुरोध किया है, वर्तमान में यह दुर्लभसिक्का शिवप्रेमियों के दर्शनार्थ पुस्तकालय में रखा गया है।

-भंडारा, अध्यक्ष, सार्वजनिक पुस्तकालय, धनंजय दलाल 

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