

Bhandara Police Housing Project: भंडारा जिला मुख्यालय की पुरानी पुलिस कॉलोनियां जर्जर होने से पुलिस परिवारों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। छतों से पानी टपकने, दीवारों में सीलन व दरारें, खराब शौचालय, टूटी जलापूर्ति पाइपलाइन और जलनिकासी जैसी समस्याएं हैं। दो खतरनाक चॉलों को गिराए जाने के बाद सरकारी आवासों की कमी और बढ़ गई है।
अब इनकी जगह आधुनिक और सुविधायुक्त आवास बनाने का काम शुरू किया गया है। जिला मुख्यालय के साथ तुमसर और साकोली में भी पुलिस आवास परियोजनाओं को गति मिली है।
जिला मुख्यालय में पहले तीन पुलिस कॉलोनियों में 206 आवास थे। इनमें से दो चॉलों के 122 आवास जर्जर और खतरनाक होने के कारण गिरा दिए गए। वर्तमान में तीसरी चॉल में 42 आवास शेष हैं, लेकिन उनकी स्थिति भी संतोषजनक नहीं है।
पर्याप्त सरकारी आवास नहीं होने से जिला मुख्यालय के करीब 400 पुलिस परिवार निजी मकानों में किराए पर रह रहे हैं। किराए के साथ बच्चों की शिक्षा, आवागमन और अन्य खर्चों का आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है। पुलिस कर्मियों की ड्यूटी को देखते हुए कार्यस्थल के आसपास सरकारी आवास उपलब्ध होना महत्वपूर्ण है।
जिला मुख्यालय में जर्जर चॉलों की जगह सात मंजिला इमारत बनाई जा रही है। इसमें 10 पुलिस अधिकारियों और 112 पुलिस कर्मचारियों के लिए कुल 122 आवास होंगे। परियोजना का काम अंतिम चरण में है। इससे असुरक्षित आवासों में रहने वाले पुलिस परिवारों को सुरक्षित और सुविधायुक्त आवास मिल सकेगा।
कारधा पुलिस थाना क्षेत्र में नई पुलिस कॉलोनी का निर्माण पूरा हो चुका है और अधिकारी-कर्मचारी वहां रहने भी लगे हैं। तुमसर और साकोली में भी पुलिस आवास परियोजनाओं का काम शुरू है। जिले में करीब 1,600 पुलिस अधिकारी-कर्मचारी कार्यरत हैं। इनमें लगभग 600 जिला मुख्यालय में और करीब 1,000 अधिकारी-कर्मचारी सात तहसीलों के विभिन्न पुलिस थानों में कार्यरत हैं। वहीं लाखनी, लाखांदुर, पवनी और मोहाड़ी की पुलिस कॉलोनियों की स्थिति भी चिंताजनक बताई जा रही है। यहां कहीं मरम्मत तो कहीं पुनर्निर्माण की आवश्यकता है।