Bhandara News: भंडारा जिले में धान खरीदी की प्रक्रिया पिछले 2 महीने से ठप पड़ी है। किसानों के लिए यह खरीफ सीजन उम्मीदों के बजाय चिंताओं का सबब बन गया है। धान खरीदी की अंतिम तिथि 31 मार्च बेहद करीब आ चुकी है, और अब केवल 17 दिन शेष बचे हैं।
सरकारी तंत्र की सुस्ती के कारण किसान इस समय दोहरी मार झेल रहे हैं। एक तरफ धान केंद्रों और घरों में पड़ा हुआ धान सड़ रहा है, तो दूसरी तरफ बेचे गए धान का भुगतान न मिलने से उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले रबी सीजन में धान की खरीदी में रिकॉर्ड तोड़ बढ़ोतरी देखी गई थी। जहां एक वर्ष पूर्व रबी की खरीदी केवल 3 लाख क्विंटल थी, वहीं पिछले रबी सीजन में यह बढ़कर 18 लाख क्विंटल तक पहुंच गई।
हालांकि, इस खरीफ सीजन में भी भारी आवक का अनुमान लगाया गया था, लेकिन जब खरीदी की रफ्तार चरम पर थी, तभी सरकार ने नई लिमिट रोक दी। जिला मार्केटिंग फेडरेशन ने शासन से अतिरिक्त 20 लाख क्विंटल धान खरीदी की लिमिट बढ़ाने की मांग की है।
सरकारी केंद्रों पर लिमिट न होने और खरीदी बंद होने के कारण परेशान किसान औनेपौने दामों पर अपना धान निजी व्यापारियों को बेचने के लिए मजबूर हैं। किसानों का कहना है कि कड़ी मेहनत के बाद उपजाया गया धान अब उनकी आंखों के सामने खराब हो रहा है।
संकट केवल खरीदी तक सीमित नहीं है, बल्कि भुगतान यानी चुकारे की स्थिति भी बेहद दयनीय है। जिले के 88,115 किसानों को अब तक भुगतान नहीं मिला है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति और भी खराब हो गई है।