भंडारा: सरकारी खजाने में पैसा पर अन्नदाता के हाथ खाली, तकनीकी पेच और बैंक मॉडिफिकेशन में फंसे करोड़ों रुपये
किसानों को धान बिक्री का भुगतान नहीं मिल रहा, तकनीकी समस्याओं के कारण राशि अटकी हुई है।
Bhandara Paddy Procurement News: भंडारा जिले में खरीफ सीजन के दौरान सरकारी केंद्रों पर धान बेचने वाले किसानों के सामने अब अपनी ही मेहनत की कमाई पाने का संकट खड़ा हो गया है। समर्थन मूल्य पर धान बिक्री के बावजूद किसानों को कई हफ्तों से भुगतान नहीं मिला है, जिससे वे बैंक और सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
स्थिति की गंभीरता इस बात से समझी जा सकती है कि किसानों के भुगतान की राशि संबंधित खातों में उपलब्ध होने के बावजूद तकनीकी अड़चन के कारण यह सीधे किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर नहीं हो पा रही है। बताया जा रहा है कि बैंक खातों के मॉडिफिकेशन (डेटा अपडेट) की प्रक्रिया अधूरी होने से करीब करोड़ों रुपये अटके हुए हैं।
जिला स्तर पर खरीफ पणन सत्र 2025-26 में बड़े पैमाने पर धान खरीदी की गई थी। लेकिन भुगतान प्रक्रिया में आई तकनीकी खामी ने किसानों की आर्थिक स्थिति पर सीधा असर डाला है। मार्केटिंग फेडरेशन के खातों में राशि जमा होने के बावजूद वितरण नहीं हो पा रहा है।
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इस बीच रबी सीजन शुरू होने से किसानों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। खाद, बीज और मजदूरी के लिए नकदी की तत्काल जरूरत है, लेकिन फसल का भुगतान अटकने से वे आर्थिक दबाव में आ गए हैं। कई किसानों ने इसे मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना जैसा बताया है।
जिला मार्केटिंग फेडरेशन के अधिकारियों के अनुसार शासन से निधि प्राप्त हो चुकी है, लेकिन बैंक खातों में विसंगतियों और तकनीकी सुधार की प्रक्रिया के चलते भुगतान में देरी हो रही है। अधिकारियों ने जल्द समस्या दूर कर राशि हस्तांतरित करने का आश्वासन दिया है।
कम किसान, ज्यादा खरीदी
आंकड़ों के अनुसार, पिछले खरीफ सत्र 2024-25 में जिले के विभिन्न केंद्रों पर बड़ी संख्या में किसानों ने धान बेचा था, जबकि चालू सत्र 2025-26 में यह संख्या कुछ कम रही है। इसके बावजूद उत्पादन अधिक होने से इस बार खरीदी का कुल आंकड़ा पिछले वर्ष से ज्यादा रहा।
नई लिमिट नहीं मिलने से केंद्र बंद
जिले में इस बार कई खरीदी केंद्रों को नई लिमिट नहीं मिलने के कारण समय से पहले बंद करना पड़ा, जिससे भी किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
