भंडारा जिले में धान की फसल पर खरपतवार का कहर, महंगी दवाएं बेअसर, मजदूरी बनी बड़ा संकट
Bhandara Agriculture News: भंडारा में ग्रीष्मकालीन धान की फसल पर खरपतवार का संकट बढ़ रहा है। महंगी दवाओं का असर नहीं, किसानों की आर्थिक स्थिति खराब हो रही है।
Bhandara Farmer Crisis News: भंडारा जिले में ग्रीष्मकालीन धान की फसल पर खरपतवार का गंभीर संकट मंडरा रहा है। खेतों में तेजी से फैल रहे खरपतवार ने फसल की वृद्धि को रोक दिया है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। हालात ऐसे हैं कि धान की फसल अपेक्षित ऊंचाई तक भी नहीं पहुंच पा रही है। किसानों ने बाजार में उपलब्ध महंगे खरपतवार नाशकों का बड़े पैमाने पर छिड़काव किया, लेकिन इस बार ये रसायन असरहीन साबित हो रहे हैं।
हजारों रुपये खर्च करने के बावजूद परिणाम न मिलने से किसानों का निवेश डूबता नजर आ रहा है। रासायनिक उपाय विफल होने के बाद अब किसानों के पास पारंपरिक निराई का ही सहारा बचा है। एक हेक्टेयर खेत में खरपतवार साफ कराने के लिए 10 से 12 हजार रुपये तक खर्च करना पड़ रहा है।
मजदूरों की कमी और बढ़ती दिहाड़ी ने छोटे किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल दिया है। तेज धूप में काम के बावजूद खेत पूरी तरह साफ नहीं हो पा रहे हैं, जिससे समस्या और गंभीर हो गई है।
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बुनियादी सुविधाओं की भी मार
किसान सिर्फ खरपतवार से ही नहीं, बल्कि बुनियादी सुविधाओं की कमी से भी जूझ रहे हैं। हाल की आंधी में कई खेतों के सोलर पैनल क्षतिग्रस्त हो गए हैं, वहीं नहरों का पानी अंतिम छोर तक नहीं पहुंचने से खेत सूखने लगे हैं। खरीफ सीजन में नुकसान झेलने के बाद किसानों को रबी फसल से उम्मीद थी, लेकिन बढ़ती लागत और घटते उत्पादन की आशंका ने उनकी चिंताएं और बढ़ा दी हैं।
कृषि विभाग पर सवाल
फसल संकट के बीच किसानों को कृषि विभाग से किसी ठोस मार्गदर्शन या राहत की उम्मीद थी, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है। किसानों ने मांग की है कि विभाग जल्द सर्वे कर तकनीकी सलाह और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराए। समय रहते समाधान नहीं होने पर जिले के किसानों के एक बार फिर कर्ज के जाल में फंसने का खतरा बढ़ गया है।
