भंडारा नगर परिषद में कल सजेगी राजनीतिक बिसात, समितियों के गठन पर सबकी नजर, किसे मिलेगी स्थायी समिति की कमान?

Bhandara News: भंडारा नगर परिषद में 27 जनवरी को विभिन्न विषय समितियों के सभापतियों का चयन होगा। 23 नगरसेवकों के साथ भाजपा के वर्चस्व और अन्य दलों के समीकरणों पर टिकी सबकी नजरें।
Bhandara Nagar Parishad Committee Selection
भंडारा नगर परिषद (सोस: सोशल मीडिया)
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Bhandara Nagar Parishad Committee Selection: महाराष्ट्र के भंडारा नगर परिषद में कल यानी 27 जनवरी को सत्ता के समीकरणों की नई तस्वीर साफ होगी। नगर परिषद की स्थायी समिति समेत प्रमुख विषय समितियों के गठन की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। भाजपा के पास स्पष्ट बहुमत होने के कारण मुख्य पदों पर भगवा दबदबा तय माना जा रहा है।

क्या है भंडारा नगर परिषद की स्थिति?

भंडारा नगर परिषद की कुल सदस्य संख्या 35 है, जिसमें से 23 सीटों पर भारतीय जनता पार्टी का कब्जा है। इस भारी बहुमत के कारण स्थायी समिति और अन्य महत्वपूर्ण विभागों के सभापति पदों पर भाजपा की जीत महज एक औपचारिकता नजर आ रही है। हालांकि, पर्दे के पीछे की राजनीति अब गठबंधन और अंदरूनी तालमेल पर केंद्रित हो गई है।

इन महत्वपूर्ण समितियों पर होगा फैसला

कल होने वाली बैठक में मुख्य रूप से निम्नलिखित समितियों के सभापतियों का चुनाव किया जाना है:

  • स्थायी समिति (Standing Committee)
  • जलापूर्ति समिति (Water Supply)
  • निर्माण समिति (Public Works)
  • स्वास्थ्य समिति (Health Committee)
  • महिला एवं बाल कल्याण समिति (Women & Child Welfare)

शिवसेना और एनसीपी की भूमिका पर सस्पेंस

भले ही भाजपा के पास पूर्ण बहुमत है, लेकिन पिछली बार शिवसेना के पांच नगरसेवकों के समर्थन के बदले उन्हें एक स्वीकृत सदस्य पद दिया गया था। अब चर्चा इस बात की है कि क्या आगामी चुनावों को देखते हुए भाजपा अपने सहयोगी दलों (शिवसेना या राकांपा) को किसी समिति की कमान सौंपकर 'राजनीतिक समन्वय' का संदेश देगी या सभी पदों पर अपने ही पार्षदों को बिठाएगी।

पार्टी के भीतर लॉबिंग तेज

सभापति पद की कुर्सी हासिल करने के लिए भाजपा के भीतर ही होड़ मची हुई है। कई दिग्गज नगरसेवक पार्टी आलाकमान के सामने अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। विकास कार्यों के लिए बजट आवंटन में इन समितियों की अहम भूमिका होती है, यही कारण है कि नगरसेवकों के बीच आंतरिक प्रतिस्पर्धा चरम पर है। अब देखना यह है कि पार्टी नेतृत्व अनुभव को तरजीह देता है या नए चेहरों को मौका मिलता है।

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