भंडारा-गोंदिया विधान परिषद चुनाव में बड़ा उलटफेर, अब अविनाश ब्राह्मणकर और नरेश ईश्वरकर की सीधी टक्कर

Bhandara Gondia MLC Election Twist: भंडारा-गोंदिया विधान परिषद चुनाव में बंसोड और अग्रवाल के नामांकन वापस लेने से मुकाबला अब अविनाश ब्राह्मणकर और नरेश ईश्वरकर के बीच सीधा होगा।
Bhandara Gondia MLC Election
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स - सोशल मिडिया)
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Naresh Ishwarkar Political Strategy: भंडारा और गोंदिया जिले की राजनीति में विधान परिषद चुनाव को लेकर नाटकीय घटनाक्रम सामने आया है। नामांकन वापसी के अंतिम दिन गुरुवार को हुए घटनाक्रम ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। महाविकास आघाड़ी की अप्रत्याशित रणनीति के चलते चुनावी मुकाबले का पूरा समीकरण बदल गया है। कांग्रेस के दिलीप बंसोड और निर्दलीय उम्मीदवार प्रफुल अग्रवाल द्वारा नामांकन वापस लेने के बाद अब भंडारा-गोंदिया विधान परिषद चुनाव में सीधा मुकाबला महायुति समर्थित उम्मीदवार अविनाश ब्राह्मणकर और महाविकास आघाड़ी समर्थित नरेश ईश्वरकर के बीच होने जा रहा है।

महायुति में भी नाराजगी की चर्चा: दूसरी ओर महायुति

उम्मीदवार अविनाश ब्राह्मणकर की उम्मीदवारी को लेकर भाजपा और राष्ट्रवादी कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ताओं में असंतोष की चर्चा भी सामने आ रही है। ब्राह्मणकर मूल रूप से राष्ट्रवादी कांग्रेस से जुड़े रहे हैं और भाजपा द्वारा उन्हें टिकट दिए जाने से कुछ स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं में नाराजगी बताई जा रही है। इसके अलावा, स्थानीय स्तर पर सहयोगी दलों के बीच मतभेदों और कुछ नेताओं की कथित नाराजगी को भी चुनावी समीकरणों को प्रभावित करने वाला कारक माना जा रहा है।

दिग्गज नेताओं के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई बना चुनाव

  • भंडारा-गोंदिया विधान परिषद चुनाव अब दोनों राजनीतिक गठबंधनों के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है। महायुति के लिए यह सीट जीतकर क्षेत्र में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करना महत्वपूर्ण है।
  • वहीं महाविकास आघाड़ी और विशेष रूप से नाना पटोले के लिए यह चुनाव अपने प्रभाव और राजनीतिक शक्ति का प्रदर्शन करने का अवसर माना जा रहा है।
  • हालांकि संख्याबल के आधार पर शुरुआत में महायुति का पलड़ा भारी माना जा रहा था, लेकिन नामांकन वापसी के बाद बदले समीकरण, स्थानीय असंतोष और महाविकास आघाड़ी की नई रणनीति ने मुकाबले को बेहद रोचक बना दिया है।
  • अब सभी की नजरें मतदान और परिणामों पर टिकी हैं, क्योंकि यह चुनाव केवल दो उम्मीदवारों के बीच की लड़ाई नहीं, बल्कि महायुति और महाविकास आघाड़ी की राजनीतिक रणनीति तथा नेतृत्व क्षमता की भी बड़ी परीक्षा माना जा रहा है।

नामांकन वापसी से बदले राजनीतिक समीकरण: विधान परिषद

चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि तक कुल 11 उम्मीदवारों ने पर्चे भरे थे। इनमें दिलीप बंसोड, अभिषेक कारेमोरे और प्रफुल अग्रवाल जैसे प्रमुख नाम शामिल थे। हालांकि नामांकन वापसी के अंतिम दिन इन सभी नेताओं ने चुनाव मैदान से हटने का निर्णय लिया। इसके बाद जिला परिषद के निर्माण सभापत्ति नरेश ईश्वरकर, भाजपा समर्थित अविनाश ब्राह्मणकर और सचिन कुंभलकर के नामांकन ही वैध रह गए।

सबसे अधिक चर्चा महाविकास आघाड़ी के उस फैसले की हो रही है, जिसमें अंतिम समय में दिलीप बंसोड और प्रफुल अग्रवाल जैसे दिग्गज नेताओं को पीछे रखते हुए नरेश ईश्वरकर को समर्थन देने का निर्णय लिया गया।

पटोले की रणनीति पर चर्चा

इस फैसले के बाद नाना पटोले की राजनीतिक रणनीति चर्चा का विषय बन गई है। कांग्रेस ने अपना अलग उम्मीदवार उतारने के बजाय नरेश ईश्वरकर को समर्थन देकर महायुति के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला महाविकास आघाड़ी के लिए जोखिम भरा भी साबित हो सकता है, जबकि कुछ इसे पटोले की दूरदर्शी राजनीतिक चाल बता रहे हैं, जिला परिषद में सत्ता परिवर्तन के दौरान जिस प्रकार पटोले ने राजनीतिक समीकरण बदलकर नरेश ईश्वरकर को महत्वपूर्ण भूमिका दिलाई थी, उसी रणनीति की पुनरावृति इस चुनाव में देखने को मिल सकती है।

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