नागपुर में इंसाफ: दिव्यांग महिला से दरिंदगी करने वाले 'उस' हैवान को मरते दम तक उम्रकैद!

Nagpur Court Verdict: नागपुर में बौद्धिक दिव्यांग महिला से दरिंदगी करने वाले दिलीप शेंडे को उम्रकैद। DNA रिपोर्ट ने खोली पोल। कोर्ट ने 'मनोधैर्य योजना' के तहत मुआवजे की सिफारिश की।
Nagpur Special Court sentences 54-year-old Dilip Shende to life imprisonment for raping an intellectually disabled woman.
नागपुर न्यूज
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Rape Case Life Imprisonment:बौद्धिक रूप से दिव्यांग महिला के साथ दुष्कर्म कर उसे गर्भवती बनाने के मामले में नागपुर की विशेष अदालत ने आरोपी दरिंदे को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। दोषी करार दिया गया आरोपी रोहणा, नरखेड़ निवासी दिलीप नत्थू शेंडे (54) है। इस मामले में सह आरोपी नितिन उर्फ नरेंद्र नीलकांत नारनवरे (43) को सबूतों के अभाव में बरी कर गया।

यह घटना वर्ष 2017 में जलालखेड़ा पुलिस थाना क्षेत्र में घटी थी। पीड़िता स्थायी रूप से बौद्धिक दिव्यांग थी और स्वयं की सुरक्षा करने में असमर्थ थी। दिसंबर 2017 में उसके शरीर में दिखाई देने वाले बदलावों से परिजनों को संदेह हुआ। जब उसे डॉक्टर के पास ले जाया गया, तब उसके गर्भवती होने की पुष्टि हुई। जांच के दौरान विशेष शिक्षक की मदद से दर्ज किए गए बयान में पीड़िता ने आरोपी दिलीप शेंडे का नाम बताया था।

फैसला और ठोस सबूत

इस प्रकरण में न्यायाधीश जे.ए. शेख ने कहा कि मामले में कोई प्रत्यक्षदर्शी गवाह नहीं है और पीड़िता की मानसिक स्थिति को देखते हुए उसकी प्रत्यक्ष गवाही दर्ज करना संभव नहीं था। इसके बावजूद अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत परिस्थितिजन्य सबतों को न्यायालय ने स्वीकार किया। डीएनए जांच में यह सिद्ध हुआ कि आरोपी दिलीप ही पीड़िता के गर्भ में पल रहे भ्रूण का जैविक पिता था, जो इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण सबूत साबित हुआ।

इसके अलावा एक गवाह ने आरोपी और पीड़िता को एक निर्जन स्थान पर साथ देखे जाने की गवाही दी। पीड़िता ने मृत शिशु को जन्म दिया था और उसके नमूने जांच के लिए सुरक्षित रखे गए थे।

घृणित कृत्य

न्यायालय ने दिलीप शेंडे को भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2)(न) और 376(2) के तहत दोषी ठहराया। बौद्धिक दिव्यांग महिला के साथ दुष्कर्म को अत्यंत घृणित अपराध बताते हुए अदालत ने आरोपी को आजीवन कारावास (मृत्यु तक) और 10,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। साथ ही पीड़िता की स्थिति को ध्यान में रखते हुए ‘मनोधैर्य योजना’ के तहत मुआवजा दिए जाने की सिफारिश जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से की। मामले में सरकार पक्ष की ओर से अधिवक्ता प्रशांत साखरे ने प्रभावी पैरवी की।

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