Bhandara News: भंडारा में कम बारिश से धान उत्पादन पर संकट, किसानों ने मांगी आर्थिक सहायता
Bhandara Farmers: भंडारा जिले में सामान्य से केवल 50% बारिश होने से धान की नर्सरी सूखने लगी है। अब तक केवल 10% क्षेत्र में धान की बुआई हो सकी है। किसान दोबारा बुआई और आर्थिक नुकसान की आशंका है।
- Written By: आंचल लोखंडे
भंडारा किसान- एआय जनरेटेड फोटो (सोर्सः सोशल मीडिया)
Bhandara Low Rainfall: मानसून शुरू हुए लगभग दो महीने बीत चुके हैं, लेकिन भंडारा जिले में पर्याप्त बारिश नहीं होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। जिले में अब तक सामान्य वर्षा का केवल 50 प्रतिशत ही रिकॉर्ड हुआ है। बारिश के अभाव में धान की नर्सरी (पौध) सूखने लगी है और रोपाई का कार्य संकट में पड़ गया है। खेतों की तैयारी, बीज, उर्वरक और मजदूरी पर किया गया लाखों रुपये का खर्च डूबने की आशंका से किसान परेशान हैं। यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो दोबारा बुआई की नौबत आ सकती है। जिले के सिंचाई परियोजनाओं, तालाबों और जलाशयों में पर्याप्त जलभराव नहीं हो सका है।
नदियां और नाले भी लगभग सूखे पड़े हैं, जिससे सिंचाई करना मुश्किल हो गया है। धान उत्पादन के लिए प्रसिद्ध भंडारा जिले में पानी की कमी के कारण फसलों की बढ़वार रुक गई है। किसानों द्वारा तैयार की गई धान की नर्सरी सूखने लगी है, जिससे उनकी मेहनत पर पानी फिरता नजर आ रहा है। किसानों ने खरीफ सीजन से पहले खेतों की जुताई, महंगे बीज और उर्वरकों पर भारी खर्च किया है।
भंडारा में सामान्य से 50% कम बारिश
मजदूरी की बढ़ती लागत ने खेती को पहले ही महंगा बना दिया था, अब फसल सूखने से आर्थिक संकट और गहरा गया है। किसानों ने प्रशासन से फसलों के नुकसान का तत्काल सर्वेक्षण कर राहत देने की मांग की है। जिले के कई हिस्सों में बुआई पूरी हो चुकी है, लेकिन पर्याप्त नमी नहीं मिलने से फसलें सूखने लगी हैं। यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो किसानों को दोबारा बुआई करनी पड़ेगी। इसके लिए फिर से बीज और खाद खरीदना छोटे एवं गरीब किसानों के लिए मुश्किल होगा। किसानों ने सरकार से आर्थिक सहायता और तत्काल राहत पैकेज देने की मांग की है।
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केवल 10 प्रतिशत क्षेत्र में धान की बुआई
कृषि विभाग के अनुसार, जिले में इस खरीफ सीजन के लिए 1 लाख 87 हजार 379 हेक्टेयर क्षेत्र में बुआई का लक्ष्य रखा गया है। अब तक केवल 19 हजार 327 हेक्टेयर क्षेत्र में विभिन्न फसलों की बुआई हुई है, धान के लिए प्रस्तावित 1 लाख 74 हजार 985 हेक्टेयर क्षेत्र के मुकाबले अब तक केवल 12 हजार 383 हेक्टेयर (करीब 10 प्रतिशत) क्षेत्र में ही धान की बुआई एवं रोपाई हो सकी है। इसमें 7,766 हेक्टेयर में सीधी बुआई तथा 5,071 हेक्टेयर में रोपाई की गई है। हालांकि, जिले में 15 हजार 163 हेक्टेयर क्षेत्र में धान की नर्सरी तैयार की जा चुकी है। किसानों को उम्मीद है कि अच्छी बारिश होते ही इन पौधों की रोपाई तेज गति से शुरू हो जाएगी।
