Gudi Padwa Celebration: महाराष्ट्र की मिट्टी हमेशा से अपनी समृद्ध परंपराओं और सर्वधर्म समभाव के लिए जानी जाती है। इसी सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए, भंडारा क द लॉडर्स पब्लिक स्कूल में ‘विविधता में एकता’ के संकल्प के साथ गुड़ी पड़वा और रमजान ईद का पर्व एक साथ बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। स्कूल परिसर में आयोजित इस दोहरे उत्सव ने न केवल बच्चों को अपनी जड़ों से जोड़ा, बल्कि उन्हें सामाजिक सौहार्द का पाठ भी पढ़ाया।
कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ पारंपरिक तरीके से गुड़ी स्थापना के साथ हुआ। स्कूल के मुख्याध्यापक और शिक्षकों ने विधि-विधान से गुड़ी की पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर स्कूल के नन्हे विद्यार्थियों ने मराठी संस्कृति की जीवंत झलक पेश की। पारंपरिक वेशभूषा में सजे बच्चों ने गुड़ी पड़वा के ऐतिहासिक और वैज्ञानिक महत्व पर प्रभावशाली भाषण दिए। ढोल-ताशों की गूँज और केसरिया ध्वज के बीच पूरा परिसर भक्तिमय हो गया।
मराठी नववर्ष के स्वागत के साथ-साथ, स्कूल में रमजान ईद की खुशियां भी साझा की गईं। विद्यार्थियों ने कुरआन पाठ, प्रेरणादायक भाषण और एक लघुनाटिका के माध्यम से ईद-उल-फितर के वास्तविक अर्थ को समझाया। छोटे-छोटे बच्चों ने गले मिलकर एक-दूसरे को ईद की मुबारकबाद दी, जो समाज में आपसी प्रेम और भाईचारे का सशक्त संदेश था। मंच पर दिखाई गई लघुनाटिका ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और यह सिखाया कि त्योहार चाहे कोई भी हो, उनका मूल उद्देश्य मानवता की सेवा ही है।
कार्यक्रम के समापन पर स्कूल के प्रशासकीय अधिकारी डॉ. आशीष पालीवाल ने विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा, “शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि बच्चों को एक अच्छा इंसान बनाना है। हर धर्म का सम्मान करना और आपसी सद्भाव के साथ रहना ही हमारे देश की सबसे बड़ी शक्ति है।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे आयोजनों से छात्रों के भीतर सामाजिक सौहार्द और एक-दूसरे के प्रति सम्मान की भावना को मजबूती मिलती है।
इस आयोजन ने यह साबित कर दिया कि जब बच्चे अलग-अलग संस्कृतियों को करीब से देखते हैं, तो उनके मन में पूर्वाग्रहों की जगह प्रेम और आदर का भाव जागृत होता है।