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भंडारा में मानसून की देरी से बढ़ी किसानों की चिंता, कृषि विभाग ने बुवाई टालने की दी सलाह

Agriculture Department Advisory: भंडारा में मानसून में देरी से खरीफ सीजन की शुरुआत धीमी। कृषि विभाग ने 40 मिमी बारिश के बाद ही बुआई करने और लागत घटाने के लिए 'पेरीव तकनीक' की सलाह दी है।

  • Written By: केतकी मोडक
Updated On: Jun 12, 2026 | 01:44 PM

चिंतित किसान प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स - सोशल मिडिया)

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Bhandara Monsoon Delay: जून का दूसरा सप्ताह शुरू होने के बावजूद जिले में मानसून की सक्रियता अब तक नहीं दिखी है। मृग नक्षत्र लगभग सूखा गुजरने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। समय से बारिश नहीं होने के कारण इस वर्ष पारंपरिक ‘धूल बुआई’ के प्रति भी किसानों में उत्साह नहीं है।

अधिकांश किसान जल्दबाजी करने के बजाय अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं। कृषि विभाग ने भी पर्याप्त वर्षा होने तक बुवाई नहीं करने की सलाह दी है। जिले में खरीफ सीजन 2026 के लिए लगभग 1.98 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खेती का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, लेकिन बारिश की अनिश्चितता के कारण खेती की शुरुआत धीमी पड़ गई है।

किसानों ने अपनाई सतर्क रणनीति

इस वर्ष जिले में धान, अरहर, सोयाबीन और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई का लक्ष्य रखा गया है। रोहिणी नक्षत्र पूरी तरह सूखा रहा, जबकि मृग नक्षत्र के शुरुआती दिनों में केवल हल्की बारिश हुई। इससे खेतों की तैयारी लगभग पूरी होने के बावजूद बुआई शुरू नहीं हो सकी है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार 12 से 15 जून के बीच भी बारिश में कमी रहने की संभावना है। ऐसे में कृषि विभाग ने किसानों को स्पष्ट सलाह दी है कि कम से कम 40 मिलीमीटर वर्षा होने के बाद ही बुवाई करें, ताकि बीज खराब होने और दोबारा बुवाई की नौबत से बचा जा सके।

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धूल बुआई को लेकर किसानों में सतर्कता धूल बुआई एक पारंपरिक पद्धति है, जिसमें बारिश की संभावना को देखते हुए सूखी जमीन में पहले ही बीज बो दिए जाते हैं। हालांकि पिछले वर्षों के अनुभवों और मौसम की अनिश्चितता के कारण इस बार अधिकांश किसानों ने यह जोखिम लेने से परहेज किया है। बढ़ती बीज लागत और दोबारा बुवाई के खर्च से बचने के लिए किसान फिलहाल बारिश का इंतजार कर रहे हैं।

1.96 लाख हेक्टेयर में खरीफ फसलों की योजना

कृषि विभाग ने खरीफ सीजन 2026 के लिए करीब 1.96 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फसलों की बुवाई का लक्ष्य रखा है। इसमें सबसे अधिक 1.81 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती की जाएगी। इसके अलावा 11,400 हेक्टेयर में अरहर तथा 1,140 हेक्टेयर में सोयाबीन की खेती का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। योजना में गन्ने की खेती भी शामिल है।

कृषि विभाग की सलाह

भंडारा जिला कृषि अधीक्षक अधिकारी संगीता माने ने बताया कि जिले में खरीफ सीजन के लिए बीज और उर्वरकों का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। बदलते मौसम को देखते हुए किसानों को पारंपरिक पद्धति के बजाय पेरीव तकनीक अपनानी चाहिए। इससे श्रम और उर्वरक की लागत कम होती है तथा प्रति एकड़ 8 से 10 हजार रुपये तक की बचत संभव है। विभाग विभिन्न तालुकों में इस तकनीक का प्रदर्शन कर किसानों को जागरूक कर रहा है।

किसानों की चिंता बरकरार

किसान प्रभुदास येरणे ने कहा कि पिछले वर्ष कटाई के समय बारिश ने नुकसान पहुंचाया था, जिससे भारी आर्थिक हानि हुई। इस बार भी मौसम की अनिश्चितता बनी हुई है, इसलिए जल्दबाजी में बुवाई करने के बजाय पर्याप्त बारिश होने के बाद ही खेती शुरू करना सुरक्षित रहेगा।

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जलस्रोतों की स्थिति और महत्वपूर्ण सलाह

  • 11 जून तक जिले में औसतन केवल 8.7 मिलीमीटर वर्षा दर्ज हुई है, जो सामान्य का मात्र 4.6 प्रतिशत है।
  • बारिश में देरी के कारण जिले की कई नदियां, नाले और तालाब लगभग सूख चुके हैं तथा कुओं और बोरवेल का जलस्तर भी घट गया है।
  • कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि कैवल सतही बारिश देखकर बुवाई न करें, बल्कि मिट्टी में कम से कम 4 से 6 इंच तक पर्याप्त नमी सुनिश्चित होने के बाद ही बीज बोएं।
  • साथ ही केवल प्रमाणित बीजों का उपयोग करें और बारिश की स्थिति स्पष्ट होने तक जल्दबाजी में बुआई करने से बचें।

Bhandara kharif season monsoon delay paddy farming department advisory 2026

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Published On: Jun 12, 2026 | 01:44 PM

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