इस डस्ट प्रदूषण की वजह से पाऊन गांव के मासूम बच्चों और बुजुर्गों में दमा, एलर्जी और श्वसन (सांस) संबंधी बीमारियां तेजी से फैल रही हैं। इतना ही नहीं, यह काली राख हवा में उड़कर आस-पास के खेतों में खड़ी फसलों पर जम रही है, जिससे प्रफोटोसिंथेसिस रुकने से फसलों का उत्पादन बुरी तरह घट गया है और किसानों को भारी आर्थिक चपत लग रही है।