Bhandara Education Rights: भंडारा एक ओर देश डिजिटल इंडिया की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर भंडारा जिले के तुमसर तहसील अंतर्गत खैरटोला गांव में शिक्षा का अधिकार आज भी जोखिम भरे हालातों में सिमटा नजर आ रहा है। यहां के छोटे-छोटे बच्चों को रोजाना ढाई किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल जाना पड़ता है, लेकिन यह सफर सामान्य नहीं, बल्कि जानलेवा साबित हो सकता है।
खैरटोला से खंदाल तक का रास्ता घने जंगल से होकर गुजरता है, जहां बाघ, तेंदुआ, भालू और जंगली सूअर जैसे खतरनाक वन्यजीवों का लगातार खतरा बना रहता है। मासूम बच्चे पीठ पर बस्ता और मन में डर लेकर इस रास्ते से गुजरते हैं। कई बार माता-पिता मजदूरी के लिए बाहर चले जाते हैं, जिससे बच्चों को अकेले ही यह जोखिम उठाना पड़ता है।
हैरानी की बात यह है कि इस मार्ग पर एसटी बस का संचालन होता है, लेकिन खैरटोला के बच्चों के लिए बस नहीं रुकती। “गांव वहां, बस” जैसी योजनाएं यहां केवल कागजों तक सीमित दिखाई देती हैं। सुरक्षित परिवहन और वैकल्पिक मार्ग के अभाव में बच्चों का भविष्य अधर में लटका हुआ है।
कभी-कभार कोई राहगीर मदद कर देता है, तो कभी खंदाल जिला परिषद स्कूल के मुख्याध्यापक जीवन संग्रामे अपनी दोपहिया वाहन से कुछ बच्चों को स्कूल पहुंचाते हैं। हालांकि, सभी बच्चों को रोज इस तरह सहायता देना संभव नहीं हो पाता।
स्थानीय पालकों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता है। उनका कहना है कि यदि किसी दिन जंगली जानवर का हमला हो गया, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा।
ग्रामीणों और पालकों ने जिला प्रशासन एवं परिवहन विभाग से मांग की है कि खैरटोला के विद्यार्थियों के लिए तत्काल बस सेवा शुरू की जाए। किसी संभावित दुर्घटना का इंतजार किए बिना इन मासूमों को सुरक्षित और सुगम शिक्षा उपलब्ध कराना अब प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी बन गई है।