Bhandara NSS Camp News: भंडारा शहर के टाकली स्थित शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान में प्राचार्य विजय लाकड़े के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय सेवा योजना के 7 दिवसीय आवासीय शिविर का सफल आयोजन किया गया।
शिविर के दौरान प्रतिदिन आयोजित बौद्धिक सत्रों में विद्यार्थियों को विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा मार्गदर्शन दिया गया। इसी क्रम में श्वान और रेबीज विषय पर जे। एम। पटेल महाविद्यालय, भंडारा के सूक्ष्मजीवशास्त्र विभाग के सेवानिवृत्त विभागाध्यक्ष डॉ। राजेंद्र शाह ने महत्वपूर्ण जानकारी दी। राष्ट्रीय सेवा योजना के शिविरार्थियों सहित विभिन्न औद्योगिक शाखाओं के लगभग 200 विद्यार्थी उपस्थित रहे।
डॉ. शाह ने कहा कि समाज में रेबीज बीमारी के प्रति अज्ञानता के कारण अनावश्यक भय का वातावरण बना हुआ है। उन्होंने बताया कि केवल कुत्ते ही नहीं, बल्कि बंदर और बिल्लियां भी रेबीज वायरस के वाहक हो सकते हैं, लेकिन उनके काटने से हर बार रेबीज हो, यह जरूरी नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई रेबीजग्रस्त जानवर काटे और पीड़ित व्यक्ति समय पर एंटीरेबीज टीका न ले, तभी इस बीमारी का खतरा बढ़ता है।
समय पर टीकाकरण से रेबीज जैसी घातक बीमारी से बचाव संभव है। बताया कि देश के सभी शासकीय अस्पतालों में एंटीरेबीज उपचार सुविधा निःशुल्क उपलब्ध है। इन बातों का रखे ख्यालप्राथमिक उपचार के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि कुत्ता, बंदर या बिल्ली के काटने पर जख्म को तुरंत साबुन और पानी से 23 बार अच्छी तरह धोना चाहिए और उसी घोल को कुछ समय तक जख्म पर लगा रहने देना चाहिए।
इससे लगभग 75 प्रतिशत तक संक्रमण का खतरा कम किया जा सकता है। कार्यक्रम के सफल आयोजन में राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी सुनील साठवने, महिला कार्यक्रम अधिकारी वंदना भुरे, गट निर्देशक मोहन बदुकले, सुधाकर शेंडे, शरदकुमार साखरवाड़े तथा सविता लेंडे का विशेष योगदान रहा।
भंडारा शहर के टाकली स्थित शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान में प्राचार्य विजय लाकड़े के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय सेवा योजना के 7 दिवसीय आवासीय शिविर का सफल आयोजन किया गया।
शिविर के दौरान प्रतिदिन आयोजित बौद्धिक सत्रों में विद्यार्थियों को विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा मार्गदर्शन दिया गया। इसी क्रम में श्वान और रेबीज विषय पर जे। एम। पटेल महाविद्यालय, भंडारा के सूक्ष्मजीवशास्त्र विभाग के सेवानिवृत्त विभागाध्यक्ष डॉ। राजेंद्र शाह ने महत्वपूर्ण जानकारी दी। राष्ट्रीय सेवा योजना के शिविरार्थियों सहित विभिन्न औद्योगिक शाखाओं के लगभग 200 विद्यार्थी उपस्थित रहे।
डॉ। शाह ने कहा कि समाज में रेबीज बीमारी के प्रति अज्ञानता के कारण अनावश्यक भय का वातावरण बना हुआ है। उन्होंने बताया कि केवल कुत्ते ही नहीं, बल्कि बंदर और बिल्लियां भी रेबीज वायरस के वाहक हो सकते हैं, लेकिन उनके काटने से हर बार रेबीज हो, यह जरूरी नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई रेबीजग्रस्त जानवर काटे और पीड़ित व्यक्ति समय पर एंटीरेबीज टीका न ले, तभी इस बीमारी का खतरा बढ़ता है।
समय पर टीकाकरण से रेबीज जैसी घातक बीमारी से बचाव संभव है। बताया कि देश के सभी शासकीय अस्पतालों में एंटीरेबीज उपचार सुविधा निःशुल्क उपलब्ध है। इन बातों का रखे ख्यालप्राथमिक उपचार के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि कुत्ता, बंदर या बिल्ली के काटने पर जख्म को तुरंत साबुन और पानी से 23 बार अच्छी तरह धोना चाहिए और उसी घोल को कुछ समय तक जख्म पर लगा रहने देना चाहिए।
इससे लगभग 75 प्रतिशत तक संक्रमण का खतरा कम किया जा सकता है। कार्यक्रम के सफल आयोजन में राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी सुनील साठवने, महिला कार्यक्रम अधिकारी वंदना भुरे, गट निर्देशक मोहन बदुकले, सुधाकर शेंडे, शरदकुमार साखरवाड़े तथा सविता लेंडे का विशेष योगदान रहा।