MLC Election 2026: भंडारा-गोंदिया में उम्मीदवारों पर सस्पेंस बरकरार, महायुति और कांग्रेस की रणनीति पर नजर
MLC Election:भंडारा-गोंदिया स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन क्षेत्र के विधान परिषद चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया के अंतिम दौर तक किसी भी दल ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं, जिससे चुनावी सस्पेंस गहरा गया है।
- Written By: केतकी मोडक
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्सः फाइल फोटो- सोशल मीडियाा)
Bhandara-Gondia MLC Election: भंडारा-गोंदिया स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन क्षेत्र की विधान परिषद चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं, लेकिन चुनावी तस्वीर अभी भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो सकी है। चुनाव आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार 25 मई से नामांकन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, किंतु 1 जून को नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि होने के बावजूद अब तक किसी भी उम्मीदवार ने अपना नामांकन पत्र दाखिल नहीं किया है। इस स्थिति ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं और अटकलों का दौर तेज कर दिया है।
पत्ते नहीं खोल रहे राजनीतिक दल
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अंतिम समय तक उम्मीदवारों के नाम गोपनीय रखना दलों की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। बगावत रोकने तथा विरोधी दलों की रणनीति पर नजर बनाए रखने के लिए प्रमुख राजनीतिक दल अपने पत्ते अंतिम क्षण तक नहीं खोल रहे हैं। हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों के बाद होने वाला यह पहला विधान परिषद चुनाव होने के कारण इसे दोनों जिलों में राजनीतिक वर्चस्व की परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है।
उम्मीदवार चयन को लेकर मंथन
राजनीतिक दल उम्मीदवार चयन में केवल संगठनात्मक निष्ठा ही नहीं, बल्कि उनकी राजनीतिक स्वीकार्यता और चुनावी प्रबंधन क्षमता को भी महत्व दे रहे हैं। यह सीट राष्ट्रवादी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल के प्रभाव वाले क्षेत्र के रूप में मानी जाती है, लेकिन वर्तमान समीकरणों में यह सीट भाजपा के खाते में बताई जा रही है। इसी बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस के नेता एवं बीडीसीसी बैंक अध्यक्ष सुनील फुंडे के उस बयान ने राजनीतिक चर्चाओं को और हवा दे दी, जिसमें उन्होंने कहा था कि यदि गठबंधन के वरिष्ठ नेताओं और प्रफुल्ल पटेल का निर्देश मिला तो वे भाजपा के चुनाव चिह्न पर भी चुनाव लड़ने को तैयार हैं। हालांकि सूत्रों का मानना है कि भाजपा अपने ही किसी निष्ठावान कार्यकर्ता या नेता को उम्मीदवार बना सकती है।
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कांग्रेस की नजर महायुति पर
दूसरी ओर कांग्रेस ‘वेट एंड वॉच’ की रणनीति पर काम कर रही है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले और सांसद प्रशांत पडोले की भूमिका इस चुनाव में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। महायुति में किसी प्रकार का मतभेद या असंतोष उभरने की स्थिति में कांग्रेस इसका राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश करेगी।
अंतिम दिन पर टिकी निगाहें, लोगों की निगाहें टिकी
फिलहाल चुनावी माहौल शांत दिखाई दे रहा है, लेकिन राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह शांति तूफान से पहले की शांति है। नामांकन की अंतिम प्रक्रिया के दौरान चुनाव का वास्तविक स्वरूप सामने आएगा। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि कौन-कौन उम्मीदवार मैदान में उतरते हैं और किस राजनीतिक गठबंधन की रणनीति मतदाताओं को प्रभावित करने में सफल रहती है।
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मतदाताओं का गणित
भंडारा-गोंदिया स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन क्षेत्र में नगर परिषद, पंचायत समिति और जिला परिषद के कुल 457 जनप्रतिनिधि मतदाता हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार महायुति के पास भारतीय जनता पार्टी के 173, राष्ट्रवादी कांग्रेस (अजित पवार गुट) के 84 तथा शिवसेना (शिंदे गुट) के 14 सदस्य है। वहीं विपक्षी खेमे में कांग्रेस के 106 सदस्य, वंचित बहुजन आधाड़ी का 1, बसपा के 3, चाबी संगठन के 4, 33 निर्दलीय सदस्य तथा 15 पंचायत समिति सभापतियों का समर्थन माना जा रहा है। आंकड़ों के आधार पर महायुति का पलड़ा भारी दिखाई देता है, हालांकि महाविकास आघाड़ी भी संयुक्त रूप से मुकाबला करने की तैयारी में है।
