भंडारा-गोंदिया विधान परिषद सीट पर भाजपा-राकांपा में घमासान, महायुति में बढ़ा तनाव
BJP NCP Seat Dispute: भंडारा-गोंदिया विधान परिषद सीट को लेकर भाजपा और राकांपा के बीच खींचतान तेज हो गई है। सीट बंटवारे के विवाद से महायुति में नए राजनीतिक समीकरण बनने की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
- Written By: केतकी मोडक
सुनील फुंडे (सोर्स - फोईल फोटो)
Bhandara Gondia MLC Election BJP NCP Dispute: भंडारा-गोंदिया स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन क्षेत्र के विधानपरिषद चुनाव के मद्देनजर महायुति में सीट बंटवारे का पेंच बुरी तरह फंस गया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल का गढ़ माने जाने वाले भंडारा-गोंदिया जिले की इस प्रतिष्ठित सीट को अपने पास रखने के लिए भारतीय जनता पार्टी पूरी तरह अड़ी हुई है। दूसरी ओर, इस सीट पर अपना पारंपरिक दावा बनाए रखने के लिए राकांपा नेता भी बेहद आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं।
इस राजनीतिक रस्साकशी के बीच अब स्थानीय राजनीतिक हलकों में यह बड़ा सवाल उठने लगा है कि क्या भाजपा वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल को उनके ही गृह जिले में घेरने की सुनियोजित कोशिश कर रही है।
दोनों दलों ने ठोका अपनी जीत का दावा
राकांपा की ओर से पूर्व विधायक राजेंद्र जैन और सुनील फुंडे ने इस सीट से चुनाव लड़ने की अपनी पूरी तैयारी कर ली है। हालांकि, भाजपा ने राकांपा के इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए अपना पक्ष और अधिक मजबूत किया है। भाजपा नेताओं का तर्क है कि वर्ष 2016 के चुनाव में भाजपा इस जिले में तीसरे नंबर पर थी, फिर भी पार्टी ने इस सीट पर ऐतिहासिक जीत हासिल की थी।
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वर्तमान राजनीतिक स्थिति में भाजपा इस निर्वाचन क्षेत्र में पहले नंबर पर है और कुल मतदाताओं में से 50 प्रतिशत से अधिक मतदाता अकेले भाजपा के पास हैं। इसलिए संख्या बल के ठोस आधार पर यह सीट केवल भाजपा ही लड़ेगी, ऐसा स्थानीय भाजपा नेताओं ने साफ कर दिया है।
भाजपा के सिंबल पर भी लड़ने को तैयार
इस बीच, राकांपा नेता और भंडारा जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक के अध्यक्ष सुनील फुंडे ने एक सनसनीखेज बयान देकर सियासी हलचल बढ़ा दी है। उन्होंने कहा है कि यदि महायुति के वरिष्ठ नेताओं और प्रफुल्ल पटेल ने अंतिम आदेश दिया, तो वे भाजपा के चुनाव चिह्न पर भी चुनाव लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। इस निर्वाचन क्षेत्र में कुल 457 मतदाता हैं।
लोकसभा चुनाव में भाजपा ने इस क्षेत्र से चुनाव लड़ा था, इसलिए आगामी विधानपरिषद चुनाव में महायुति के मित्रपक्ष के नाते यह सीट राकांपा के लिए छोड़ी जानी चाहिए, ऐसी राकांपा की मूल मांग है।
समझौते के संकेत और बदले समीकरण
भाजपा नेता परिणय फुके ने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया था कि भाजपा यह सीट राकांपा के लिए छोड़ने को कतई तैयार नहीं है और वह अपने ही सिंबल पर चुनाव लड़ने के फैसले पर कायम है। इस पृष्ठभूमि में सुनील फुंडे ने समझौते के सीधे संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि महायुति सरकार को बनाए रखना और हर हाल में सीट जीतना हमारा मुख्य लक्ष्य है, इसलिए यदि पार्टी के सर्वोच्च नेता प्रफुल्ल पटेल निर्देश देते हैं, तो उन्हें भाजपा के चिह्न पर भी मैदान में उतरने में कोई आपत्ति नहीं है।
अपने इस बयान का समर्थन करते हुए फुंडे ने अतीत के राजनीतिक समीकरणों का हवाला दिया कि इससे पहले विधानसभा चुनाव में भी राकांपा नेता अविनाश ब्राह्मणकर ने भाजपा के चिह्न पर चुनाव लड़ा था।
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…तो कांग्रेस को मिलेगा राजनीतिक लाभ
- भंडारा-गोंदिया विधानपरिषद निर्वाचन क्षेत्र में महायुति के मित्रपक्षों का रुख अगर ऐसा ही अड़ियल रहा, तो दोनों के आपसी झगड़े में किसी तीसरे को फायदा होने की पूरी संभावना है। इसका सीधा लाभ महाविकास आघाड़ी को मिल सकता है। सीट बंटवारे को लेकर चल रहे इस तीव्र आंतरिक विवाद के कारण मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को बड़ा राजनीतिक लाभ मिलने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
- चुनाव के ठीक मुहाने पर यहां के कुछ राजनीतिक समीकरण अप्रत्याशित रूप से बदल सकते हैं, ऐसी चर्चाएं अब जोर पकड़ने लगी हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यदि महायुति में समय रहते व्यावहारिक समझौता नहीं हुआ, तो ऐन वक्त पर कुछ बेहद चौंकाने वाले घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं। दोनों पार्टियों के अड़ियल रुख के कारण फिलहाल सीट बंटवारे का यह गतिरोध और अधिक बढ़ गया है।
