

Uday Samant Marathi Language Minister: महाराष्ट्र में मराठी भाषा और साहित्य को बढ़ावा देने के लिए प्रत्येक जिले में ‘कविताओं का गांव’ और ‘पुस्तकों का गांव’ विकसित करने की योजना बनाई गई है। इसी योजना के तहत भंडारा जिले के गणेशपुर को ‘पुस्तकों का गांव’ और लाखनी को ‘कविताओं का गांव’ के रूप में विकसित किया जाएगा। यह घोषणा उद्योग एवं मराठी भाषा मंत्री डॉ. उदय सामंत ने गुरुवार को जिला कलेक्टर कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में की।
गणेशपुर को साहित्यकार ना. रा. शेंडे की साहित्यिक विरासत से जोड़ा गया है, जबकि लाखनी को साहित्यकार द. सा. बोरकर के साहित्यिक योगदान के कारण ‘कविताओं का गांव’ के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया गया है। मंत्री ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य स्थानीय साहित्यिक परंपरा को पहचान देना और नई पीढ़ी को मराठी भाषा एवं साहित्य से जोड़ना है।
डॉ. सामंत ने बताया कि राज्य के प्रत्येक जिला कलेक्टर कार्यालय में मराठी भाषा विभाग का स्वतंत्र कक्ष स्थापित किया जाएगा। इसके लिए प्रत्येक जिले में मराठी भाषा अधिकारी की नियुक्ति की जाएगी। इससे सरकारी कामकाज में मराठी भाषा के प्रभावी उपयोग और भाषा संबंधी गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद है।
प्रेस वार्ता के दौरान मंत्री ने मराठी भाषा के विशेषज्ञों और साहित्यकारों के साथ भी चर्चा की। इसमें प्रा. सुमंत देशपांडे, डॉ. सुरेश खोब्रागड़े, डॉ. ममता राऊत और अमृत बनसोड़ सहित अन्य साहित्यकार शामिल हुए। चर्चा में स्थानीय साहित्य, भाषा संवर्धन और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।
मंत्री डॉ. उदय सामंत ने जिले में मराठी की स्थानीय बोली और साहित्य को बढ़ावा देने के लिए हर वर्ष झाड़ीबोली साहित्य सम्मेलन आयोजित करने की घोषणा की। इसके लिए सालाना 25 लाख रुपये का प्रावधान किए जाने की जानकारी दी गई।
इस वर्ष पहला झाड़ीबोली साहित्य सम्मेलन गडचिरोली में आयोजित किया जाएगा। इसके बाद भंडारा, गोंदिया और चंद्रपुर जिलों में क्रमवार सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। इसके माध्यम से स्थानीय साहित्यकारों और लेखकों को मंच उपलब्ध कराने पर जोर रहेगा।
डॉ. उदय सामंत ने जिले में नाट्यगृह निर्माण को गति देने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि साहित्य और भाषा के साथ नाटक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जाएगा। ‘पुस्तकों का गांव’ और ‘कविताओं का गांव’ जैसी पहल के जरिए स्थानीय साहित्यिक विरासत को संरक्षित करने के साथ पर्यटन और सांस्कृतिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।