

Maharashtra Government Demand Withdrawal: महाराष्ट्र शासन के आदिवासी विकास विभाग की ओर से हाल में जारी किए गए दो शासकीय आदेशों को लेकर आदिवासी छात्रों में नाराजगी बढ़ गई है। गुरुवार को सैकड़ों छात्रों ने अमरावती के अपर आयुक्त कार्यालय पहुंचकर धरना प्रदर्शन किया। छात्रों ने आदिवासी विकास विभाग के अपर आयुक्त को ज्ञापन सौंपते हुए 5 और 14 अगस्त 2026 को जारी आदेशों को तत्काल रद्द करने के साथ छात्रावास, छात्रवृत्ति और शैक्षणिक सुविधाओं से जुड़ी लंबित समस्याओं के समाधान की मांग की।
छात्रों का आरोप है कि इन दोनों शासकीय निर्णयों के जरिए सामाजिक आंदोलनों, छात्र संगठनों और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने पर प्रतिबंध लगाने का प्रयास किया जा रहा है। छात्रों ने इसे छात्र विरोधी बताते हुए कहा कि ऐसे निर्णय उनके संवैधानिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को प्रभावित करते हैं।
अमरावती जिले में प्रदर्शन के दौरान 1,000 क्षमता वाले शासकीय लड़कों के छात्रावास की क्षमता बढ़ाकर 2,000 करने की मांग प्रमुखता से रखी गई। छात्रों का कहना है कि बढ़ती संख्या के अनुरूप छात्रावास में पर्याप्त सीटें उपलब्ध नहीं हैं, जिससे कई विद्यार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
इसके अलावा पुलिस भर्ती प्रक्रिया के दौरान असमय मृत्यु का शिकार हुए एक छात्र के परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता देने की मांग भी ज्ञापन में की गई। छात्रों ने ड्रेस कोड, प्रोजेक्ट, शैक्षणिक भ्रमण, खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए समय पर बजट उपलब्ध कराने की मांग रखी।
आश्रमशालाओं में लागू सेंट्रल किचन योजना बंद करने की मांग भी छात्रों ने की है। छात्रों का कहना है कि भोजन व्यवस्था से जुड़े स्थानीय स्तर के मुद्दों को देखते हुए इस योजना की समीक्षा जरूरी है।
छात्रों ने छात्रावास में प्रवेश के लिए प्राप्त और लंबित सभी आवेदनों पर तत्काल निर्णय लेने की मांग की। उनका कहना है कि पात्र विद्यार्थियों को समय पर छात्रावास की सुविधा नहीं मिलने से उनकी पढ़ाई प्रभावित होती है।
इसके साथ ही (MahaDBT) छात्रवृत्ति का पुनर्भुगतान चालू शैक्षणिक सत्र में समय पर करने की मांग की गई। छात्रों ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय योजना के तहत लंबित राशि भी विद्यार्थियों के बैंक खातों में तुरंत जमा करने की मांग रखी।
अमरावती जिले के छात्रों ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय योजना के लिए अलग से स्वतंत्र ऑनलाइन पोर्टल शुरू करने की मांग भी की है। उनका कहना है कि ऑनलाइन व्यवस्था होने से आवेदन, भुगतान और योजना की स्थिति की जानकारी विद्यार्थियों को आसानी से मिल सकेगी।
छात्रों ने चेतावनी दी कि यदि विवादित शासकीय आदेश वापस लेने और उनकी अन्य मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को आगे बढ़ाया जा सकता है।