Bhandara Farmers Compensation: पिछले वर्ष अक्टूबर और नवंबर महीने में हुई बेमौसम अतिवृष्टि के कारण धान की फसल को भारी नुकसान पहुँचा था। कटी हुई फसल खेतों में ही अंकुरित हो जाने से किसानों का पूरा सीजन बर्बाद हो गया।
अब प्रशासन की ओर से नुकसान के पंचनामे पूरे कर पात्र लाभार्थियों की सूची जारी कर दी गई है। मुआवजे की राशि सीधे बैंक खातों में जमा करने के लिए सरकार ने ईकेवाईसी अनिवार्य कर दिया है, जिसके चलते पालांदुर और आसपास के सेतु केंद्रों पर किसानों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है।
अतिवृष्टि से प्रभावित किसानों को 3 हेक्टेयर की सीमा तक 10 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर के हिसाब से मदद मिलने का अनुमान है। प्रशासन ने सोशल मीडिया के माध्यम से नुकसान की सूची सार्वजनिक कर दी है, जिससे किसान अपना नाम खोजने और ईकेवाईसी की प्रक्रिया पूरी करने के लिए केंद्रों की ओर दौड़ रहे हैं।
हालांकि, ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट और ऑनलाइन सेवाओं के बारबार बाधित होने के कारण एक किसान की प्रक्रिया पूरी होने में घंटों लग रहे हैं, जिससे केंद्रों पर लंबी कतारें लग रही हैं।
कईयों के खता नंबर गलत पंचनामा करते समय प्रशासन ने किसानों के बैंक खातों की जानकारी एकत्रित की थी, लेकिन अब जारी की गई सूची में कई किसानों के खाता नंबर गलत दर्ज होने की बात सामने आई है।
इन तकनीकी गलतियों के कारण किसानों को डर सता रहा है कि उनकी मेहनत की कमाई और हक का मुआवजा अटक न जाए। प्रभावित किसानों ने मांग की है कि इन त्रुटियों को सुधारने के लिए उन्हें सरकारी दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें, बल्कि स्थानीय स्तर पर शिविर लगाकर सुधार कार्य किया जाए।
जल्दबाजी न करने की अपील एक साथ सैकड़ों किसानों के केंद्रों पर पहुँचने के कारण सर्वर पर लोड बढ़ गया है। खराशी स्थित सीएससी केंद्र संचालक कार्तिक झलके ने किसानों से अपील की है कि वे संयम रखें।
उन्होंने स्पष्ट किया कि ईकेवाईसी के लिए केवल आज की ही समय सीमा अनिवार्य नहीं है, इसलिए किसान घबराएं नहीं और केंद्रों पर सहयोग करें ताकि प्रक्रिया सुचारू रूप से पूरी की जा सके।