

Highlights:
भंडारा जिले में अनियमित बारिश के कारण 2,08,695 किसानों की फसल प्रभावित हुई है।
ट्रिगर-1 और ट्रिगर-2 के तहत 33 प्रतिशत से अधिक नुकसान वाले फसल क्षेत्र का रकबा 77,818.44 हेक्टेयर तक पहुंच गया है।
जिला प्रशासन ने प्रभावित किसानों को आर्थिक सहायता देने के लिए राज्य सरकार को 132 करोड़ 24 लाख 62 हजार 980 रुपए का प्रस्ताव भेजा है।
Bhandara Drought Affected Farmers: अनियमित बारिश के कारण खरीफ सीजन का गणित बिगड़ जाने से जिले के धान उत्पादक किसानों पर सूखे का भारी संकट आ पड़ा है। ट्रिगर-1 और ट्रिगर-2 के तहत 33 प्रतिशत से अधिक नुकसान वाली फसलों का रकबा 77 हजार 818.44 हेक्टेयर तक पहुंच गया है।
इस आपदा से जिले के 2 लाख 8 हजार 695 किसान प्रभावित हुए हैं। जिला प्रशासन ने प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए 132 करोड़ 24 लाख 62 हजार 980 रुपए के वित्तीय पैकेज का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा है। मानसूनी बारिश की बेरुखी धान का कटोरा माने जाने वाले भंडारा जिले में इस बार मानसूनी बारिश की बेरुखी ने खेती को बुरी तरह प्रभावित किया है।
सीजन की शुरुआत से ही बारिश में लंबा अंतराल रहने के कारण फसलों की वृद्धि रुक गई, पौधों के फैलाव पर असर पड़ा और बालियों में दाने भरने की प्रक्रिया भी बाधित हुई। इसके साथ ही कीटों और बीमारियों का प्रकोप बढ़ने से पैदावार में भारी गिरावट की आशंका जताई जा रही है।कर्ज लेकर बुआई करने वाले किसानों के सामने अब पैदावार में कमी और कर्ज चुकाने की दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है।
मोहाडी तहसील में सबसे अधिक नुकसान दर्ज किया गया है, जहां 19 हजार 137.80 हेक्टेयर कृषि भूमि प्रभावित हुई है और 45 हजार 583 किसानों को नुकसान पहुंचा है। वहीं, प्रभावित किसानों की संख्या के मामले में तुमसर तहसील शीर्ष पर है, जहां 49 हजार 330 किसान प्रभावित हुए हैं।
आंकड़े बताते हैं कि भंडारा तहसील में 34,912 किसानों की 15,783 हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई है जिसके लिए 26.78 करोड़ रुपए मांगे गए हैं। तुमसर में 14,830.84 हेक्टेयर के लिए 25.21 करोड़, पवनी में 41,399 किसानों की 14,618.80 हेक्टेयर फसल के लिए 24.85 करोड़ और लाखांदुर में 37,471 किसानों की 13,448 हेक्टेयर फसल के लिए 22.86 करोड़ रुपए की सहायता राशि का प्रस्ताव तैयार किया गया है।
जिले की भंडारा, पवनी, लाखांदूर, तुमसर और मोहाडी तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है, जबकि लाखनी और साकोली तहसीलों को इस सूची से बाहर रखे जाने पर स्थानीय किसानों में भारी नाराजगी व्याप्त है। हालांकि, इस बारे में सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है। लेकिन यह दोनों तहसीलें अभी भी सूखाग्रस्त घोषित नहीं हो पाई है। जून से सितंबर के दौरान जिले में औसतन 1,114.99 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन इस साल केवल 872.99 मिमी बारिश ही दर्ज की गई, जो सामान्य से 242.01 मिमी कम यानी महज 78.30 प्रतिशत है।
इस बीच, आपदा प्रबंधन व राहत पुनर्वास विभाग ने सूखा प्रभावित क्षेत्रों के पात्र किसानों को दिवाली से पहले 5 हजार रुपए प्रति किसान की अग्रिम सहायता राशि देने का निर्णय लिया है। यह राशि सीधे डीबीटी के माध्यम से किसानों के बैंक खातों में भेजी जाएगी। आगे मिलने वाली कुल राहत राशि में से यह अग्रिम राशि समायोजित की जाएगी, जिलाधिकारी ने सभी बैंकों को सख्त निर्देश जारी किए है कि अग्रिम के तौर पर मिलने वाली इस सहायता राशि को कर्ज या अन्य किसी वसूली के लिए काटा न जाए।