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राज्य सरकार ने नासिक जिले की त्र्यंबकेश्वर, चांदवड और निफाड तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित किया।
इससे पहले जिले की 10 तहसीलें सूखा सूची में शामिल थीं।
अब नासिक की कुल 15 में से 13 तहसीलें सूखाग्रस्त घोषित की गई हैं।
बारिश की कमी से फसलों को नुकसान के साथ पेयजल और पशुओं के चारे का संकट भी बढ़ा।
Maharashtra Government Drought Declaration: किसानों के बढ़ते आक्रोश और बारिश की कमी से फसलों को हुए भारी नुकसान को देखते हुए राज्य सरकार ने नासिक जिले की त्र्यंबकेश्वर, चांदवड और निफाड तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित किया है। इससे पहले जिले की 15 में से 10 तहसीलों को सूखाग्रस्त सूची में शामिल किया गया था। अब तीन और तहसीलों के शामिल होने से जिले की कुल 13 तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है।
इस वर्ष बारिश की कमी और फसल के महत्वपूर्ण चरण में। वर्षा नहीं होने से खेतों में खड़ी फसलें सूख गई। इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। इसके साथ ही पेयजल और पशुओं के चारे की समस्या भी गंभीर हो गई है। राज्य सरकार ने इससे पहले प्रदेश की 265 तहसीलों में सूखा घोषित किया था।
उस सूची में नासिक जिले की मालेगांव, नांदगांव, येवला, देवला, पेठ, सुरगाणा, कलवण, सिन्नर, इगतपुरी और बागलाण तहसीलें शामिल थीं। हालांकि, चांदवड, निफाड और त्र्यंबकेश्वर में फसलों की खराब स्थिति के बावजूद इन्हें शुरुआती सूची में जगह नहीं मिली थी।
इसके बाद किसानों ने जनप्रतिनिधियों और प्रशासन पर सूखा घोषित करने के लिए दबाव बढ़ाया। इन क्षेत्रों में आंदोलन भी हुए। किसानों के आक्रोश और जमीनी स्थिति को देखते हुए सरकार ने इन तीन तहसीलों को भी सूखाग्रस्त घोषित करने का निर्णय लिया।
मंगलवार, 14 तारीख को हुई महाराष्ट्र राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में 40 और तहसीलों में सूखा घोषित किया गया। इनमें नासिक जिले की त्र्यंबकेश्वर, चांदवड और निफाड तहसीलें भी शामिल हैं।
जिले की नासिक और दिडोरी तहसीले अभी भी सूखाग्रस्त सूची से बाहर है।
स्थानीय किसानों और किसान संगठनों का कहना है कि इन दोनों क्षेत्रों में भी फसलों को काफी नुकसान हुआ है।
इसलिए 'आनेवारी वानी फसल की स्थिति के आकलन और अन्य दस्तावेजों से जुड़ी तकनीकी अड़चनों को दूर कर इन तहसीलों को भी तत्काल सूखाग्रस्त सूची में शामिल किया जाना चाहिए।