

कृषि महाविद्यालय परिसर में वसंतराव नाईक सभागार का निर्माण वर्षों से अधूरा है।
प्रणय पराते ने इस मुद्दे पर हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी।
न्यायमूर्ति अनिल किलोर और न्यायमूर्ति रजनीश व्यास की पीठ ने याचिका को अभ्यावेदन मानने का आदेश दिया।
Nagpur Bench Bombay High Court: कृषि महाविद्यालय परिसर में वर्षों से अधूरे और उपेक्षित पड़े वसंतराव नाईक सभागार के मुद्दे को लेकर प्रणय पराते की ओर से हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई।
जिस पर सुनवाई के बाद न्यायाधीश अनिल किलोर और न्यायाधीश रजनीश व्यास ने जनहित याचिका को निवेदन मानकर उस पर एक सप्ताह के भीतर निर्णय लेने का आदेश पंजाबराव देशमुख कृषि विश्वविद्यालय को दिए। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता तेजस जे। पाटिल और अधिवक्ता निशित पराते ने पैरवी की।
की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने विषय की गंभीरता और तत्परता को देखते हुए माना कि इसका शीघ्र समाधान आवश्यक है। अदालत ने प्रतिवादी डॉ। पंजाबराव देशमुख कृषि विश्वविद्यालय, अकोला को आदेश दिया कि वे इस याचिका को ही अभ्यावेदन मानकर एक सप्ताह में निर्णय लें। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए विश्वविद्यालय को केवल एक सप्ताह की समयसीमा दी गई है।
याचिकाकर्ता ने 29 मई 2026 को संबंधित अधिकारियों के समक्ष निवेदन देकर सभागार का कार्य पूरा करने की मांग की थी किंतु कोई प्रभावी कार्रवाई न होने पर उन्होंने मजबूरन बॉम्बें हाई कोर्ट का रुख किया।
याचिका में सभागार का निर्माण समयबद्ध तरीके से पूरा करने, अब तक खर्च हुए कोष का हिसाब देने, परिसर की सुरक्षा सुनिश्चित करने, घटित आपराधिक घटनाओं की जांच कराने,
ढांचागत सुरक्षा का मूल्यांकन करने तथा नियमित अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने की मांग की गई।
याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि भवन का निर्माण पूरा नहीं होने के कारण अब तक खर्च निधि का कोई औचित्य नहीं बन रहा है।
इस संदर्भ में प्रतिवादियों को उचित निर्देश देने का अनुरोध भी किया।
वर्ष 2004-05 में कृषि महाविद्यालय के शताब्दी समारोह के अवसर पर विद्यार्थियों, किसानों और आम नागरिकों के लिए एक सामुदायिक सभागार बनाने का प्रस्ताव मंजूर किया गया था जिसका नाम वसंतराव नाईक सभागार तय किया गया था।
वर्ष 2005 में इसका निर्माण कार्य शुरू हुआ परंतु वर्ष 2007 में पर्यावरण संबंधी आपत्तियों के कारण अदालती प्रक्रिया शुरू हुई और निर्माण पर अंतरिम रोक लग गई।
आगे चलकर अदालती मामलों के निपटारे के बाद रोक तो हट गई लेकिन निर्माण कार्य पुनः शुरू नहीं कराया गया। इसके परिणामस्वरूप यह भव्य इमारत बीते कई वर्षों से लावारिस तथा जर्जर अवस्था में पड़ी हुई है और वहां चोरी, अनधिकृत कब्जे व आपराधिक गतिविधियों जैसी घटनाएं घटित हो रही हैं।