

Highlights:
भंडारा जिले में जनवरी से सितंबर 2026 तक कुत्तों, बिल्लियों, बंदरों और अन्य जानवरों के काटने के मामले दर्ज हुए।
कुल घटनाओं में सबसे अधिक मामले कुत्तों के काटने के हैं।
पिछले वर्ष इसी अवधि में 8,595 घटनाएं दर्ज हुई थीं, जबकि इस वर्ष 529 मामले अधिक सामने आए।
Bhandara Dog Bite Cases: भंडारा जिले में पशुओं के काटने की घटनाओं में वृद्धि दर्ज की गई है। इनमें कुत्तों के काटने का मामला सबसे अधिक गंभीर बना हुआ है। जनवरी से सितंबर 2026 तक नौ महीनों में जिले में कुत्ते, बिल्ली, बंदर और अन्य जानवरों के काटने की कुल 9,124 घटनाएं दर्ज की गई।
इनमें से 7,296 घटनाएं कुत्तों के काटने की हैं। पिछले वर्ष इसी अवधि में पशुओं के काटने की 8,595 घटनाएं दर्ज हुई थीं। इस वर्ष 529 घटनाओं की वृद्धि हुई है, जो लगभग 6.15 प्रतिशत है। इस स्थिति को देखते हुए रेबीज से बचाव के उपचार, आवारा कुत्तों पर नियंत्रण और नागरिकों में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है।
पशु काटने की घटनाओं में वृद्धि को देखते हुए नागरिकों से आवारा जानवरों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की अपील की गई है। छोटे बच्चों को कुत्तों या अन्य जानवरों के पास अकेला नहीं छोड़ना चाहिए घाव छोटा होने पर भी उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और तत्काल चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए जनवरी में सर्वाधिक मामले जिले में दर्ज कुल पशु काटने की घटनाओं में करीब 80 प्रतिशत मामले कुत्तों के काटने के हैं।
आंकड़ों के अनुसार, जनवरी में 1,090, फरवरी में 979 और मार्च में 1,011 घटनाएं दर्ज की गई। अप्रैल में 882, मई में 884 और जून में 797 लोगों को कुत्तों ने काटा। जुलाई में 557, अगस्त में 535 और सितंबर में 561 घटनाएं सामने आईं। इसके अलावा, नौ महीनों में बिल्लियों के काटने की 991, अन्य जानवरों के काटने की 461 और बंदरों के काटने की 376 घटनाएं दर्ज की गई। वर्तमान में जिले में एआरवी के 5,139 डोज और रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन के 169 डोज उपलब्ध हैं। जरूरत के अनुसार मरीजों को तत्काल उपचार देने की व्यवस्था की गई है।
कुते या किसी अन्य स्तनधारी जानवर के काटने पर घाव को तुरंत साबुन और बहते पानी से कम से कम 15 मिनट तक अच्छी तरह धोना चाहिए। इसके बाद बिना देर किए डॉक्टर के पास जाकर जांच और उपचार कराना चाहिए, डॉक्टर की सलाह के अनुसार रेबीज रोधी वैक्सीन लगवानी चाहिए और आवाश्यकता होने पर इम्युनोग्लोबुलिन भी लेना चाहिए, घाव पर मिट्टी, तेल, हल्दी, मिर्च पाउडर, नींबू या अन्य घरेलू पदार्थ नहीं लगाने चाहिए, घाव पर कसकर रही बाधने से बचे और उपचार में देरी न करें।
डॉक्टर की सलाह के अनुसार रेबीज रोधी वैक्सीन का पूरा निर्धारित कोर्स लेना चाहिए तथा जरूरत पड़ने पर इम्युनोग्लोबुलिन लेना बाहिए। जिले वैक्सीन का स्टॉक उपलब्ध रखने की व्यवस्था की गई है। नागरिक घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय समय पर चिकित्सा उपचार ले।
कुत्ताः 7,296
बिल्ली : 991
बंदर: 376
अन्य पशु: 461
कुल: 9,124