भंडारा: धनेगांव में महिला की मौत पर गहराया रहस्य; बाघ का हमला या हत्या? पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने खड़े किए सवाल
धनेगांव जंगल में महिला की मौत को पहले वन्यजीव हमला माना गया, लेकिन पोस्टमार्टम में गले पर धारदार घाव मिलने से अब हत्या की साजिश की आशंका गहरा गई है। जांच जारी है।
Bhandara Tiger Attack: तुमसर वन परिक्षेत्र के अंतर्गत धनेगांव जंगल क्षेत्र में शुक्रवार 17 अप्रैल को महुआ बीनने गई साधना सीताराम उइके (55) की मौत को लेकर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं। शुरुआत में इस घटना को बाघ या तेंदुए के हमले से जोड़कर देखा गया था, लेकिन अब सामने आए तथ्यों ने पूरे मामले को संदिग्ध बना दिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और घटनास्थल की परिस्थितियों ने कई नई आशंकाओं को जन्म दिया है।
शवविच्छेदन के दौरान मृतका के गले पर करीब 2 इंच लंबा धारदार घाव मिला, जबकि गले के दूसरी ओर किसी भी प्रकार का निशान नहीं था। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि हमला किसी जंगली जानवर ने किया होता, तो गले के दोनों ओर गहरे और गोलाकार दांतों के निशान स्पष्ट दिखाई देते। ऐसे में यह घाव किसी धारदार हथियार से किया गया प्रतीत होता है।
घटनास्थल से जहां खून के निशान मिले, वहां से लगभग 2.8 किलोमीटर दूर शव बरामद हुआ। सामान्यतः जंगली जानवर शिकार को घसीटते समय जमीन पर स्पष्ट घिसटने के निशान छोड़ते हैं, लेकिन यहां जमीन असामान्य रूप से सपाट पाई गई। इससे यह आशंका जताई जा रही है कि शव को किसी वस्तु, जैसे बोरे में बांधकर ले जाया गया हो।
मृतका के शरीर पर कंधे से कमर तक घिसटने के निशान मिले, लेकिन पैरों, विशेषकर एड़ियों पर कोई चोट नहीं पाई गई। यह तथ्य भी इस मामले को और संदिग्ध बनाता है।
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खाई में मिला शव, बढ़ा संदेह
शव लगभग 15 फीट गहरी खाई में मिला। यदि किसी जंगली जानवर ने शव को वहां तक घसीटा होता, तो उसके खुद गिरने की भी संभावना रहती। वहीं खाई के पास एक आसान रास्ता भी मौजूद था, जिसका उपयोग जानवर सामान्यतः करते हैं। ऐसे में शव का सीधे खाई में मिलना प्राकृतिक शिकार की प्रक्रिया से मेल नहीं खाता।
जांच के बाद ही होगा खुलासा
जंगल में शव मिलने के कारण वन विभाग ने प्रारंभ में इसे वन्यप्राणी का हमला माना था, लेकिन अब सामने आए तकनीकी और परिस्थितिजन्य तथ्यों को देखते हुए हत्या या साजिश की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। मामले की सच्चाई पुलिस और वन विभाग की विस्तृत जांच के बाद ही सामने आएगी।
