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महाराष्ट्र मिनरल कॉर्पोरेशन की दहेगांव कायनाइट माइंस में काम करने वाले मजदूरों को पिछले 23 वर्षों से बकाया वेतन, भत्ते और ग्रेच्युटी की राशि नहीं मिली है।
कामगार न्यायालय, भंडारा ने 10 मार्च 2003 को मजदूरों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए बकाया राशि ब्याज सहित चुकाने का आदेश दिया था।
अदालती आदेश के अनुसार कंपनी की चल-अचल संपत्ति जब्त कर या जिम्मेदार अधिकारियों के माध्यम से मजदूरों की बकाया राशि वसूल करने की मांग की गई है।
Dahegaon Kyanite Mines Workers: महाराष्ट्र मिनरल कॉर्पोरेशन की दहेगांव कायनाइट माइंस में काम करने वाले मजदूरों का धैर्य अब जवाब दे चुका है। पिछले 23 वर्षों से बकाया वेतन, भत्ते और ग्रेच्युटी की राशि न मिलने से कामगारों में भारी आक्रोश व्याप्त है। कामगार न्यायालय, भंडारा ने 10 मार्च 2003 को ही मजदूरों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए बकाया राशि का भुगतान ब्याज सहित करने का स्पष्ट आदेश जारी किया था। इसके बावजूद दो दशक से अधिक समय बीत जाने पर भी अदालती आदेश पर अमल नहीं हो सका है।
शासन और प्रशासन की इस उपेक्षा से क्षुब्ध होकर मजदूरों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि 26 नवंबर तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो वे संविधान दिवस के अवसर पर लाखांदुर तहसील कार्यालय के समक्ष बेमियादी आमरण अनशन शुरू करेंगे। कामगार न्यायालय, भंडारा के फैसले के अनुसार मधुकर डोमन खोब्रागड़े और उनके अन्य साथी कामगारों की बकाया राशि ब्याज सहित वसूल करने के निर्देश दिए गए थे।
अदालत ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया था कि यदि कंपनी सीधे भुगतान नहीं करती है, तो उसकी चल-अचल संपत्ति को जब्त कर या संचालकों व जिम्मेदार अधिकारियों के माध्यम से इस राशि की वसूली की जाए। हालांकि, 23 साल गुजर जाने के बाद भी मजदूरों को उनके हक की कमाई नहीं मिल सकी है, जो प्रशासनिक सुस्ती और कानूनी प्रक्रिया की लचर स्थिति को उजागर करता है।
कामगारों ने मांग की है कि 10 मार्च 2003 के अदालती फैसले को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए तथा कंपनी की संपत्ति बेचकर या जिम्मेदार लोगों से वसूली करके मजदूरों का बकाया वेतन, भत्ते और ग्रेच्युटी का ब्याज सहित निपटारा किया जाए।
इस संबंध में मधुकर खोब्रागड़े, रायभान नवले, माणिक कांबले, मुखलू कांबले, महानंदा कांबले, कांताबाई कांबने, पारबता हनवते सहित अन्य कामगारों ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय-सीमा में न्याय नहीं मिला, तो वे 26 नवंबर से आमरण अनशन शुरू कर देंगे और इससे उत्पन्न होने वाली किसी भी अप्रिय स्थिति की पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।