भंडारा: जलसमाधि आंदोलन के बाद एक्शन में कलेक्टर, कमकासुर में आम के पेड़ तले सुनी प्रकल्पग्रस्तों की गुहार
बावनथड़ी जलसमाधि आंदोलन के बाद जिलाधिकारी ने कमकासुर गांव का दौरा किया। उन्होंने आम के पेड़ के नीचे जनअदालत लगाकर 50 वर्षों से प्रताड़ित प्रकल्पग्रस्तों की समस्याओं का समाधान करने का आश्वासन दिया।
Bhandara News: बघेडा बावनथड़ी प्रकल्पग्रस्त संघर्ष समिति के जलसमाधि आंदोलन ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। आंदोलन के बाद जिलाधिकारी पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आए।अपनी मांगों को लेकर अड़े प्रकल्पग्रस्तों की सुध लेने के लिए जिलाधिकारी स्वयं कमकासुर के पुराने गांवठान पहुंचे।
यहां उन्होंने किसी वातानुकूलित कमरे के बजाय सीधे आम के पेड़ के नीचे बैठकर सभा ली और प्रकल्पग्रस्त आदिवासी बंधुओं के साथ संवाद साधा। लगभग दो घंटे से अधिक समय तक चली बैठक में जिलाधिकारी ने प्रकल्पग्रस्तों की समस्याओं को विस्तार से सुना। उन्होंने आश्वासन दिया कि जिला प्रशासन के अधिकार क्षेत्र में आने वाली सभी मांगों को जल्द से जल्द सुलझाया जाएगा।
साथ ही, जो मांगें शासन स्तर पर लंबित हैं, उनके लिए प्रभावी ढंग से सरकार के पास प्रयास किया जाएगा। गांव पहुंचकर कलेक्टर ने सीधे सुनी समस्याएं सभा की शुरुआत में आदिवासी बंधुओं ने धरती आबा बिरसा मुंडा की तस्वीर और महात्मा ज्योतिबा फुले व छत्रपति शिवाजी महाराज की पुस्तकें भेंट कर जिलाधिकारी का स्वागत किया।
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सभा के दौरान ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष वैभव चोपकर ने प्रस्तावना प्रस्तुत की और मांग पत्र को क्रमवार समझाते हुए जिलाधिकारी के समक्ष रखा। इस बैठक में पिछले 40 से 50 वर्षों से वनवास झेल रहे प्रकल्पग्रस्तों का दर्द खुलकर सामने आया। कुछ आदिवासी अपनी बात रखते हुए बेहद आक्रामक दिखे, तो कुछ अपनी आपबीती सुनाते हुए भावुक हो गए और उनकी आंखों से आंसू निकल पड़े।
जिलाधिकारी ने भी संवेदनशीलता दिखाते हुए हर एक व्यक्ति की बात धैर्यपूर्वक सुनी। इस महत्वपूर्ण सभा में सीतेकसा, सुसूरडोह और कमकासुर इन तीनों गांवों के करीब एक हजार नागरिक उपस्थित थे। प्रकल्पग्रस्त संघर्ष समिति के अशोक उईके, किशोर उईके सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण इस दौरान मौजूद थे। जिलाधिकारी के सीधे गांव पहुंचने से ग्रामीणों की उम्मीदें एक बार फिर जाग गई हैं।
हालांकि, प्रकल्पग्रस्तों ने चेतावनी भी दी है कि यदि निर्धारित समय के भीतर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे कड़े कदम उठाने और मौत को गले लगाने से भी पीछे नहीं हटेंगे। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इन मांगों पर कितनी तेजी से अमल करता है।
