प्रतीकात्मक फोटो (सोर्स: सोशल मीडिया)
Bhandara Child Marriage Prevention News: भंडारा जिले में बाल विवाह की कुप्रथा को समाप्त करने के लिए प्रशासन ने जनजागरूकता के साथ सख्त कार्रवाई की नीति अपनाई है। पिछले 2 वर्षों में जिला प्रशासन और बाल संरक्षण कक्ष ने सतर्कता दिखाते हुए कुल 6 बाल विवाह रोकने में सफलता हासिल की है, जिनमें से 5 मामलों में कानूनी कार्रवाई भी की गई है।
आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2024 से दिसंबर 2024 के बीच 1 बाल विवाह रोका गया, जबकि जनवरी 2025 से दिसंबर 2025 के दौरान 5 बाल विवाह रोके गए। इनमें से 4 गंभीर मामलों में सीधे अपराध दर्ज कर सख्त कार्रवाई की गई, जिससे इस कुप्रथा को बढ़ावा देने वालों में भय का माहौल बना है।
बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत जिले के 11,909 नागरिकों ने ऑनलाइन शपथ ली है। महिला एवं बाल विकास विभाग, स्वास्थ्य प्रबोधिनी, कैलाश सत्यार्थी फाउंडेशन और इंडियन वेलफेयर सोसायटी के सहयोग से ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। बाल विवाह से लड़कियों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, उनकी शिक्षा बाधित होती है और उन्हें मानसिक व सामाजिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
19 अप्रैल को अक्षय तृतीया के अवसर पर भंडारा जिले में बड़ी संख्या में विवाह समारोह आयोजित होते हैं। इस दौरान बाल विवाह की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं, खासकर आदिवासी एवं घुमंतू समाज में ऐसे विवाह छिपकर होने की संभावना रहती है।
नियम तोड़े तो जेल और जुर्माना प्रशासन ने विवाह से जुड़े सभी संबंधितों प्रेस मालिक, मंडप सज्जाकार, फोटोग्राफर, पुजारी, बैंड दल और मंगल कार्यालय संचालकों को निर्देश दिया है कि वे दूल्हा-दुल्हन की वैध आयु (लड़की 18 वर्ष, लड़का 21 वर्ष) की पुष्टि किए बिना कोई बुकिंग न लें। नियमों का उल्लंघन करने पर दो वर्ष तक की सश्रम कारावास और 1 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है।
ग्राम स्तर पर ग्रामसेवकों को बाल विवाह प्रतिबंध अधिकारी नियुक्त किया गया है, जो स्थानीय स्तर पर निगरानी और कार्रवाई कर रहे हैं। इसके अलावा आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं की मदद से गांव-गांव में जनजागरूकता कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं।
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बाल विवाह को पूरी तरह समाप्त करने के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार कर मिशन मोड में काम किया जा रहा है। किसी भी संदिग्ध मामले की जानकारी 1098 (चाइल्ड हेल्पलाइन), 112 (पुलिस) और 181 (महिला हेल्पलाइन) पर दी जा सकती है। सूचना देने वाले की पहचान गोपनीय रखी जाएगी।
– अरुण बांदुरकर, जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी
| सेवा | हेल्पलाइन नंबर |
|---|---|
| चाइल्ड हेल्पलाइन | 1098 |
| पुलिस हेल्पलाइन | 112 |
| महिला हेल्पलाइन | 181 |