भंडारा के चिचोली में पुल ढहा, किसानों का धैर्य टूटा, आंदोलन की दी चेतावनी
Bhandara News: भंडारा के चिचोली गांव में पन्नाद रोड का पुल बारिश में ढह गया। इससे किसानों को खेतों तक पहुंचने में दिक्कत हो रही है। प्रशासन की अनदेखी पर उन्होंने आंदोलन की चेतावनी दी।
- Written By: आकाश मसने
टूटे पुल के पास खड़े किसान (फोटो नवभारत)
Bhandara Chicholi Bridge Collapse: भंडारा जिले की तुमसर तहसील के चिचोली गांव में पन्नाद रोड पर बना पुल हाल ही में हुई भारी बारिश के चलते ढह गया है। इस वजह से किसानों को खेतों तक पहुंचने में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। बार-बार प्रशासन को ज्ञापन देने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं की गई है, जिससे नाराज किसानों ने तीव्र विरोध आंदोलन करने की चेतावनी प्रशासन को दी है।
ग्रामीणों का कहना है कि चिचोली और आसपास के इलाके के किसान सैकड़ों एकड़ जमीन पर खेती करते हैं। खेतों तक बैलगाड़ी, ट्रैक्टर, बीज, खाद और कृषि उपकरण ले जाने के लिए यही रास्ता सबसे सुविधाजनक और छोटा था। अब पुल ढह जाने के कारण उन्हें 5 किलोमीटर लंबा पैदल सफर तय करना पड़ रहा है।
किसानों को हो रही परेशानी
भंडारा जिले के चिचाेली में पुल ढहने के कारण खेती के कामकाज पर न केवल समय बर्बाद हो रहा है बल्कि फसल की लागत और श्रम भी दोगुना बढ़ जाने से किसानों पर परेशान होने की नौबत आ गई है।
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किसानों ने बताया कि कई बार इस पुल की मरम्मत और नए पुल निर्माण के लिए ज्ञापन सौंपे गए। लेकिन प्रशासन की ओर से आश्वासन के अलावा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। किसानों का कहना है कि अगर अब भी ध्यान नहीं दिया गया तो वे सड़क पर उतरकर जोरदार आंदोलन करेंगे।
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चिचोली के किसान मोरेश्वर रहांगडाले, छबीलाल रहांगडाले, महेंद्र रहांगडाले, रतनलाल पारधी, भैयालाल रहांगडाले, संतोष तुरकर, राजेश्वर पारधी, प्रेमलाल अंबुले, बालकृष्ण रहांगडाले, भोजराम ठाकरे, स्वप्निल ठाकरे समेत अन्य किसानों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि उनकी उपेक्षा अब और बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
शिकायतों को अनसुनी कर रही प्रशासन : रहांगडाले
मोरेश्वर रहांगडाले ने कहा, बार-बार शिकायत करने के बाद भी हमारी परेशानी नहीं सुनी गई। यदि प्रशासन जल्द ही इस पुल की मरम्मत शुरू नहीं करता, तो हम मजबूरन कड़ा विरोध प्रदर्शन करेंगे। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के मौसम में खेतों तक पहुंचना और भी कठिन हो गया है।
पानी भरे नाले पार करते समय दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है। इस कारण किसानों की रोजमर्रा की जिंदगी और उनकी आजीविका दोनों प्रभावित हो रही है। अब देखना यह होगा कि किसानों की चेतावनी के बाद प्रशासन कितनी तेजी से कार्रवाई करता है और चिचोली के किसानों की इस गंभीर समस्या का समाधान कब तक निकलता है।
