भंडारा में चिचखेडा सिंचन योजना की पाइपलाइन क्षतिग्रस्त, खरीफ सीजन पर संकट

Bhandara Irrigation Pipeline Damage: भंडारा जिले के पवनी तहसील स्थित सिंगोरी गांव में चिचखेडा उपसा सिंचन योजना की भूमिगत पाइपलाइन कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो गई है।
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Pipeline Damage (सोर्सः फाइल फोटो-सोशल मीडिया)
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Chichkheda Lift Irrigation Scheme: भंडारा पवनी तहसील के आदिवासी बहुल एवं वर्षा आधारित खेती वाले सिंगोरी गांव में किसानों के लिए बनाई गई चिचखेडा उपसा सिंचन योजना की भूमिगत पाइपलाइन गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गई है। किसानों का आरोप है कि पाइपलाइन मार्ग पर हुए मुरूम उत्खनन के कारण कई स्थानों पर पाइपलाइन टूट गई है, जिससे आगामी खरीफ सीजन में सिंचाई व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। जानकारी के अनुसार, बेटाला ग्राम पंचायत अंतर्गत सिंगोरी गांव के किसानों को स्थायी सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शासन द्वारा करोड़ों रुपये खर्च कर भूमिगत पाइपलाइन बिछाई गई थी।

फरवरी 2026 में पाइपलाइन की परीक्षण प्रक्रिया के दौरान कई स्थानों पर पाइपलाइन में रिसाव और टूटफूट सामने आई थी। इसके बाद कुछ स्थानों पर अस्थायी मरम्मत की गई, लेकिन किसानों का कहना है कि समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया। वर्तमान में पाइपलाइन कई जगहों पर क्षतिग्रस्त अवस्था में खुली पड़ी है।

मुरूम उत्खनन से हुआ सिंचाई परियोजना को नुकसान

किसानों का आरोप है कि पाइपलाइन के मार्ग पर किए गए मुरूम उत्खनन से पाइपलाइन को नुकसान पहुंचा है, जिससे सिंचाई परियोजना की उपयोगिता प्रभावित हुई है। संबंधित विभाग को दी जानकारीकिसानों का कहना है कि उन्होंने इस संबंध में कई बार स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों को जानकारी दी, लेकिन अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।

परीक्षण के बाद भी नहीं हुआ स्थायी समाधान

प्रभावित किसानों में विजय रंगारी, प्रदीप बोरकर, प्रमोद भांबोरे, वर्षा गोंडाने, यशवंता गजभिये, कोमल खोब्रागड़े, वैजयंता बोरकर, कार्तिक गजभिये, गौतम मेश्राम और सिंधुताई गजभिये सहित अनेक किसान शामिल हैं। किसानों ने मांग की है कि क्षतिग्रस्त पाइपलाइन की तत्काल जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए तथा सिंचाई व्यवस्था को पूर्ववत बहाल किया जाए।

किसानों ने दोषियों पर कार्रवाई की मांग

यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं हुआ तो खरीफ सीजन में खेती प्रभावित हो सकती है। स्थानीय स्तर पर समाधान न मिलने से किसानों ने अब जिला प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है। वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा स्थल निरीक्षण किए जाने पर वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी और समस्या के समाधान का रास्ता निकलेगा।

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