

Bhandara District Administration: वरिष्ठ साहित्यकार एवं कलाकार मानधन योजना से जुड़ी विभिन्न मांगों को लेकर जिला संयुक्त कलाकार महासंघ की ओर से 31 अगस्त को आयोजित संगीतमय आंदोलन का आखिरकार जिला प्रशासन ने संज्ञान लिया। सामाजिक आंदोलन के नेता परमानंद मेश्राम के नेतृत्व में आयोजित इस आंदोलन में कलाकारों ने मानधन समिति और लंबित प्रकरणों को लेकर अपनी मांगें प्रशासन के समक्ष रखीं।
कलाकारों की प्रमुख मांगों में राजर्षि शाहू महाराज वरिष्ठ साहित्यकार-कलाकार मानदेय अशासकीय चयन सदस्य समिति को रद्द करना, जिले से कम से कम 500 कलाकारों का मानदेय के लिए चयन करना, वर्ष 2025-26 के वृद्ध एवं वरिष्ठ कलाकारों की सभी लंबित फाइलों का तत्काल निपटारा कर पात्र कलाकारों को मानदेय मंजूर करना शामिल था।
संयुक्त बैठक में जिलाधिकारी के संज्ञान में आया कि वर्तमान अशासकीय सदस्यों में अधिकांश सदस्य कलाकार नहीं हैं। इस पर मौजूदा सदस्यों के अतिरिक्त कलाकार सदस्यों की नियुक्ति किए जाने संबंधी रिपोर्ट पालकमंत्री को भेजने की जानकारी दी गई। बैठक में जिला संयुक्त कलाकार महासंघ की ओर से विभिन्न स्तरों के कलाकारों की मानदेय संबंधी समस्याओं और मांगों को जिलाधिकारी के समक्ष रखा गया। प्रशासन की ओर से इन मांगों पर सकारात्मक चर्चा किए जाने से कलाकारों में उम्मीद जगी है।
कलाकार महासंघ का कहना है कि कलाकारों के संगीतमय आंदोलन की जिला प्रशासन द्वारा दखल लिया जाना आंदोलन की बड़ी उपलब्धि है। अब पालकमंत्री इस संबंध में क्या निर्णय लेते हैं, इस पर जिले के कलाकारों की नजरें टिकी हुई हैं। संयुक्त बैठक में जिला संयुक्त कलाकार महासंघ के अध्यक्ष भावेश कोटांगले, गणेश आथिलकर, कवि नाशिक चवरे, डॉ. पुरुषोत्तम बोंद्रे, नत्थु बांते, सोमप्रभु तांदुलकर, गणेश देशमुख, उमेश भोयर, लक्ष्मीकांत मेश्राम और शाहीर भगवान दहीवले उपस्थित थे।