

Bhandara-Gondia Election: राज्य के राजनीतिक पटल पर भंडारागोंदिया स्थानीय निकाय विधान परिषद चुनाव का रण चरम पर पहुंच चुका है। इसी बीच महायुति के खेमे से एक बेहद महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। भाजपा के संकटमोचक माने जाने वाले राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले की शिंदे सेना के विधायक नरेंद्र भोंडेकर से उनके आवास पर की गई मुलाकात ने महायुति के कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा फूंक दी है। चुनाव के ऐन वक्त पर हुई यह हाईप्रोफाइल मुलाकात महज एक शिष्टाचार नहीं, बल्कि महायुति की एकजुटता को रेखांकित करने वाली साबित हुई है।
दरअसल पिछले कुछ समय से महायुति के सहयोगी दलों भाजपा और शिंदे सेना के बीच विकास कार्यों के फंड और आपसी समन्वय की कमी को लेकर तनातनी चल रही थी। विधायक नरेंद्र भोंडेकर और भाजपा विधायक परिणय फुके के बीच जारी इस शीतयुद्ध के कारण स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ता असमंजस में थे। महायुति के उम्मीदवार का नामांकन फॉर्म भरते समय विधायक भोंडेकर की अनुपस्थिति आणि चुनाव प्रचार से शिंदे सेना की दूरी ने भाजपा खेमे में चिंता की लकीरें खींच दी थीं।
भले ही यह एक स्थानीय निकाय का चुनाव था, लेकिन भाजपा इस बेहद महत्वपूर्ण मुकाबले में कोई भी जोखिम उठाने के मूड में नहीं थी। इसी पृष्ठभूमि में शनिवार, 13 जून को चंद्रशेखर बावनकुले अचानक भंडारा पहुंचे और सीधे विधायक भोंडेकर के निवास स्थान का रुख किया। बिना किसी पूर्व सूचना या आधिकारिक दौरे के तामझाम के, बावनकुले ने बेहद आत्मीय और पारिवारिक माहौल में बातचीत की शुरुआत की।
बंद कमरे में करीब एक घंटे तक चली इस मैराथन चर्चा ने दोनों पक्षों के बीच छाए तनाव के बादलों को पूरी तरह से साफ कर दिया। इस महत्वपूर्ण बैठक में महायुति के भीतर की कई उलझनों को सुलझा लिया गया है। मुलाकात के बाद विधायक भोंडेकर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे महायुति का अटूट हिस्सा हैं और परिवार के साथ ही रहेंगे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महायुति के पास स्पष्ट बहुमत होने के बावजूद बावनकुले का यह त्वरित भंडारा दौरा दर्शाता है कि भाजपा अब किसी भी स्तर पर रिस्क नहीं लेना चाहती। इस मुलाकात के बाद अब शिंदे सेना के वोट शतप्रतिशत महायुति के उम्मीदवार के पक्ष में जाने का रास्ता साफ हो गया है।
भोंडेकर के इस रुख के बाद भंडारा-गोंदिया के राजनीतिक अखाड़े में महायुति की पकड़ और मजबूत होती दिखाई दे रही है। आगामी 18 जून को होने वाले इस चुनाव में महायुति के प्रत्याशी अविनाश ब्राह्मणकर की राह में आने वाले गतिरोध अब पूरी तरह दूर हो चुके हैं। कुल मिलाकर, इस पॉवरपैक मुलाकात ने महायुति की अंदरूनी बेचैनी को खत्म कर चुनावी रण में उसकी स्थिति को बेहद मजबूत कर दिया है, जिसकी चर्चा अब राज्य स्तर के राजनीतिक गलियारों में जोरों पर है।