Fake Disability Certificate Scam Beed प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स AI)
Beed District Council Teacher Suspension: महाराष्ट्र के बीड जिले में शिक्षा विभाग के भीतर एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। जिला परिषद द्वारा संचालित प्राथमिक विद्यालयों के आठ शिक्षकों को ‘श्रवण बाधित’ (सुनने में अक्षम) होने का झूठा दावा कर सरकारी लाभ हड़पने के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई बीड जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) जिथिन रहमान द्वारा मंगलवार, 31 मार्च 2026 को जारी आदेश के बाद की गई।
जांच में पाया गया कि इन शिक्षकों ने दिव्यांगता का फर्जी प्रमाण पत्र बनवाकर आरक्षण, पदोन्नति और आयकर में छूट जैसी रियायतों का अवैध रूप से लाभ उठाया था।
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए अली यावर जंग राष्ट्रीय वाक् एवं श्रवण दिव्यांगजन संस्थान द्वारा इन शिक्षकों का विस्तृत चिकित्सा पुनर्मूल्यांकन किया गया। संस्थान की रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ कि इन शिक्षकों की श्रवण क्षमता निर्धारित मानकों के भीतर है और वे दिव्यांगता श्रेणी में आने के पात्र नहीं हैं।
प्रशासन को लंबे समय से शिक्षकों द्वारा प्रस्तुत दिव्यांगता प्रमाण पत्रों और विशिष्ट दिव्यांगता पहचान पत्र (UDID) की प्रामाणिकता पर संदेह था। राज्य दिव्यांग कल्याण विभाग के निर्देशों के बाद जब इन शिक्षकों को दोबारा जांच के लिए मुंबई स्थित अली यावर जंग संस्थान भेजा गया, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। चिकित्सा पुनर्मूल्यांकन में आठों शिक्षकों के दावे पूरी तरह झूठे पाए गए। इसके बाद सीईओ जिथिन रहमान ने न केवल उन्हें निलंबित किया, बल्कि उनके खिलाफ विभागीय जांच के भी कड़े निर्देश दिए हैं।
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धोखाधड़ी करने वाले इन शिक्षकों पर ‘दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016’ की धारा 91 के तहत कार्रवाई की जा रही है। इस कानून के प्रावधानों के अनुसार, दिव्यांगों के लिए आरक्षित लाभों का गलत तरीके से फायदा उठाने पर दो साल तक के कारावास और एक लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। अधिकारियों का कहना है कि इन शिक्षकों ने न केवल पात्र दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों का हनन किया, बल्कि सरकार को भारी वित्तीय नुकसान भी पहुँचाया है।
बीड जिला परिषद ने अब तक कुल 35 ऐसे शिक्षकों को चिह्नित किया है जो दिव्यांगता लाभ का दावा कर रहे हैं। इनमें से आठ की जांच रिपोर्ट आ चुकी है और सभी फर्जी पाए गए हैं। शेष 27 शिक्षकों को भी अनिवार्य चिकित्सा परीक्षण कराने का आदेश दिया गया है। गौरतलब है कि निलंबित किए गए अधिकांश शिक्षक अंबाजोगाई तहसील से हैं, जबकि कुछ कैज, बीड और गेओराई तहसील के स्कूलों में कार्यरत थे। इस बड़ी कार्रवाई के बाद जिले के शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है और आने वाले दिनों में निलंबन की संख्या बढ़ने की संभावना है।