मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे मिसिंग लिंक प्रोजेक्ट में देरी, 1 मई को उद्घाटन पर संशय, जानें क्या है असली वजह

Mumbai Pune Expressway Missing Link: मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे का सफर अब और आसान होने में थोड़ा वक्त लग सकता है। पश्चिम एशिया संकट के कारण बिटुमेन की कमी से इस प्रोजेक्ट का उद्घाटन टलने की आशंका है।
pune-mumbai-expressway-missing-link-project-opening-soon
मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे मिसिंग लिंक प्रोजेक्ट (सोर्स: सोशल मीडिया)
Published on
Updated on

Mumbai Pune Expressway Missing Link Inauguration Delay: मुंबई और पुणे के बीच की दूरी को कम करने वाले बहुप्रतीक्षित 'मिसिंग लिंक प्रोजेक्ट' के उद्घाटन पर काले बादल मंडराने लगे हैं। महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (MSRDC) द्वारा निर्धारित 1 मई की समय-सीमा अब खतरे में दिख रही है। इसका मुख्य कारण भारत से हजारों मील दूर पश्चिम एशिया (Middle East) में चल रहा संघर्ष है।

बिटुमेन और ईंधन की किल्लत

मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे मिसिंग लिंक प्रोजेक्ट के अंतिम चरण के लिए आवश्यक बिटुमेन (डामर) का आयात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। अधिकारियों के अनुसार, इराक, ईरान, यूएई और सऊदी अरब जैसे देशों से होने वाली सप्लाई चेन बाधित हो गई है। हैरानी की बात यह है कि पिछले दो हफ़्तों में बिटुमेन की कीमतें 50 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं। बिटुमेन के साथ-साथ लाइट डीज़ल ऑयल की आपूर्ति में भी कमी आई है। यह तेल उन भारी मशीनों को चलाने के लिए अनिवार्य है जो डामर बिछाने का काम करती हैं।

99% काम पूरा, लेकिन पुलों पर पेंच फंसा

MSRDC के सूत्रों के अनुसार, प्रोजेक्ट का 99 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। सुरंगें और जमीनी सड़कें तैयार हैं, लेकिन केबल-स्टेड पुलों (Cable-Stayed Bridges) का ढांचागत काम हाल ही में समाप्त हुआ है। अब इन पुलों पर अंतिम लेयर बिछानी बाकी है, जो बिटुमेन की कमी के कारण अटकी हुई है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार MSRDC के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि हालात को देखते हुए उद्घाटन को टालना पड़ सकता है, लेकिन हम अभी भी 25 अप्रैल तक काम पूरा करने और 30 अप्रैल तक 'लोड टेस्टिंग' खत्म करने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं।

क्या है मिसिंग लिंक प्रोजेक्ट और क्यों है यह खास?

यह प्रोजेक्ट केवल एक सड़क नहीं, बल्कि इंजीनियरिंग का एक चमत्कार है। इसकी कुल 13.3 किलोमीटर है। यह खतरनाक और भीड़भाड़ वाले लोनावला-खंडाला घाट सेक्शन को पूरी तरह बाईपास कर देगा। यह प्रोजेक्ट शुरू होने के बाद मुंबई और पुणे के बीच यात्रा का समय 25 से 30 मिनट कम हो जाएगा। इसमें 8.87 किमी और 1.68 किमी की दो विशाल सुरंगें और दो शानदार केबल-स्टेड पुल शामिल हैं।

1995 का सपना, अब होगा पूरा

इस प्रोजेक्ट की परिकल्पना पहली बार 1995 में की गई थी, लेकिन वास्तविक काम 2018 में शुरू हुआ। कोविड-19 महामारी के कारण भी इसमें काफी देरी हुई। अब जब प्रोजेक्ट फिनिशिंग लाइन के पास है, तो वैश्विक तनाव ने एक नई चुनौती खड़ी कर दी है। हालांकि, ठेकेदार ऊंची कीमतों पर भी सामग्री खरीदने की कोशिश कर रहे हैं ताकि काम और न रुके।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com