सूरजकुंड मेला 2026: ‘शिखा’ज़ कारीगरी’ ने रैंप पर उतारा ‘ऑपरेशन सिंदूर’, भारतीय कला और देशभक्ति का अद्भुत संगम
Surajkund Mela 2026: सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला 2026 में शिखा'ज़ कारीगरी ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ थीम पर भावपूर्ण फैशन शो प्रस्तुत किया, जिसमें भारतीय साड़ियां और राष्ट्रगौरव का अनूठा संगम दिखा।
- Written By: आकाश मसने
सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेले में 'शिखा'ज़ कारीगरी' की 'ऑपरेशन सिंदूर' आधारित प्रस्तुति (फोटो नवभारत)
Shikha’s Karigari Fashion Show: सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेले का सजीव वातावरण उस समय एक भावपूर्ण कला दीर्घा में बदल गया, जब ‘शिखा’ज़ कारीगरी’ ने अपने विशेष परिधानों के माध्यम से भारतीय आत्मा की अभिव्यक्ति की। यह केवल एक फैशन शो नहीं था, बल्कि भारत की सदियों पुरानी परंपराओं, कारीगरों के परिश्रम और आधुनिक सृजनशीलता की एक जीवंत महागाथा थी।
आदिवासी जीवन से रेशम की भव्यता तक का सफर
प्रस्तुति की शुरुआत भारत के आदिवासी जीवन को समर्पित थी। प्रकृति से जुड़े इन समुदायों के संघर्ष, उनके अनुष्ठान और संस्कृति को कपड़ों की बुनावट में बेहद बारीकी से उकेरा गया था। इसके बाद मंच पर भारतीय रेशम (Silk) का वैभव बिखरा। छत्तीसगढ़ के टसर और घीचा से लेकर वाराणसी की बनारसी बुटीदार, मध्य प्रदेश की चंदेरी और केरल की कुट्टमपुल्ली साड़ियों ने अपनी गरिमापूर्ण उपस्थिति दर्ज कराई।
सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेले में ‘शिखा’ज़ कारीगरी’ की प्रस्तुति (फोटो नवभारत)
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साड़ी नहीं, यह ‘चलायमान चित्रदीर्घा’ है
कार्यक्रम का सबसे मुख्य आकर्षण वह संग्रह रहा जहाँ साड़ियों को एक ‘मूविंग आर्ट गैलरी’ के रूप में पेश किया गया। इसमें निम्नलिखित कलाओं का समावेश था।
- पिचवाई और पटचित्र
- वारली और गोंड कला
- मधुबनी और चित्तारा कला
- असमिया पारंपरिक चित्रण
सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेले में ‘शिखा’ज़ कारीगरी’ की प्रस्तुति (फोटो नवभारत)
पुरस्कार विजेता कलाकारों द्वारा हाथ से पेंट की गई इन साड़ियों में परंपरा और आधुनिकता का सटीक संतुलन दिखा। ब्रांड की संस्थापक शिखा अजमेरा ने कहा, “साड़ी मेरे लिए केवल एक वस्त्र नहीं, बल्कि एक जीवित कैनवास है। हमारा लक्ष्य है कि भारतीय कला संग्रहालयों से निकलकर लोगों के दैनिक जीवन और फैशन का हिस्सा बने।”
सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेले में ‘शिखा’ज़ कारीगरी’ की प्रस्तुति (फोटो नवभारत)
‘ऑपरेशन सिंदूर’ और वंदे मातरम् की गूंज
शो का समापन ‘प्राइड ऑफ इंडिया: ऑपरेशन सिंदूर‘ थीम के साथ हुआ। ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में यह प्रस्तुति बेहद भावनात्मक थी। देशभक्ति की धुनों के बीच जब मॉडल रैंप पर उतरे, तो पूरा परिसर ‘सारे जहाँ से अच्छा, हिंदुस्तान हमारा’ की भावना से ओतप्रोत हो गया। फैशन का यह मंच एक श्रद्धा स्थल में तब्दील हो गया, जिसे देख दर्शकों ने खड़े होकर तालियां बजाईं।
सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेले में ‘शिखा’ज़ कारीगरी’ की प्रस्तुति (फोटो नवभारत)
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कारीगरों को सशक्त बनाती एक पहल
महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) स्थित ‘शिखा’ज़ कारीगरी’ एक महिला नेतृत्व वाला स्टार्टअप है, जो भारत सरकार की ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ (ODOP) पहल का हिस्सा है। वर्तमान में 100 से अधिक राष्ट्रीय स्तर के कारीगर इस संस्था सजुड़े हैं। फैशन निर्देशक संदीप नवलखा के मार्गदर्शन में आयोजित इस शो ने यह साबित कर दिया कि पारंपरिक कलाओं को यदि सही मंच मिले, तो वे वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना सकती हैं।
