

Chhatrapati Sambhajinagar Land Acquisition Case: छत्रपति संभाजीनगर शहर के बीड बाईपास मार्ग के चौड़ीकरण के लिए किए गए भूमि अधिग्रहण तथा ध्वस्त निर्माणों के मुआवजे की मांग को लेकर दायर विशेष अनुमति याचिका पर ने राज्य सरकार और मनपा को सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया है।
वर्ष 1991 के विकास प्रारूप के अनुसार की गई इस कार्रवाई से प्रभावित भूमि मालिकों के अधिकारों पर अब सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई होगी। 2019 की कार्रवाई को दी गई चुनौती: मामला वर्ष 2019 का है, जब मनपा प्रशासन ने बीड बाईपास रोड के पास स्थित याचिकाकर्ता जावेद खान शब्बीर खान पटेल और अन्य के निर्माण ध्वस्त कर दिए थे।
इस कार्रवाई के विरोध में उन्होंने औरंगाबाद खंडपीठ में याचिका दायर की थी। हालांकि उच्च न्यायालय ने याचिका खारिज करते हुए संबंधित निर्माणों को मनपा मानकों के अनुसार अनधिकृत माना था।
यद्यपि ये निर्माण वर्ष 1990 में तात्कालीन सातारा ग्राम पंचायत की अनुमति से किए गए थे, फिर भी न्यायालय ने मनपा की कार्रवाई को उचित ठहराया था। अच इस निर्णय को सुको में चुनौती दी गई है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि सातारा गांव का मनपा सीमा में समावेश वर्ष 2015 में हुआ था और उससे पूर्व ग्रामपंचायत ही नियोजन प्राधिकरण थी, वर्ष 1986 में राज्य सरकार ने इस मार्ग के लिए 30 मीटर चौड़ाई तक भूमि अधिग्रहित की थी। मीटर से वर्ष 1991 के विकास प्रारूप में इसे 60 मीटर प्रस्तावित किया गया और उसी के अनुसार चौड़ीकरण किया गया, किंतु 30 अधिक अधिग्रहित भूमि का मुआवजा अब तक राज्य सरकार या मनपा द्वारा नहीं दिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने 20 फरवरी 2026 को मामले की सुनवाई करते हुए संबंधित पक्षों को नोटिस जारी की है। अब न्यायालय दोनों पक्षों की दलीले सुनकर आगे निर्णय करेगा, प्रकरण की अगली सुनवाई 10 अप्रैल 2026 को निर्धारित की गई है।
याचिका जावेद पटेल की ओर से अधिवक्ता सागर नंदकिशोर पाहुणे पाटील ने दायर की है, जबकि वरिष्ठ विधिज्ञ सुधांशु शशिकुमार चौधरी ने याचिकाकर्ताओं की और से पक्ष रखा।