इम्तियाज जलील
औरंगाबाद : सभी राजनीतिक दल (Political Party) महापुरुषों का नाम लेकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेकते आ रहे हैं। शिवसेना (Shiv Sena) को महाराष्ट्र (Maharashtra) में अपनी सत्ता जाने का डर सता रहा है। अपनी कुर्सी बचाने के लिए शिवसेना द्वारा परिवहन मंत्री अनिल परब (Anil Parab) के माध्यम से आयोजित राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में फिर एक बार औरंगाबाद (Aurangabad) का नाम संभाजीनगर (Sambhajinagar) करने का प्रस्ताव लाया जा रहा है। यह आरोप औरंगाबाद के एमआईएम सांसद इम्तियाज जलील (MP Imtiaz Jaleel) ने यहां लगाया।
उन्होंने बताया कि तीन सप्ताह पहले राज्य के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे औरंगाबाद दौरे पर थे। तब उन्होंने शहर में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए साफ कहा था, कि जब तक वे ऐतिहासिक औरंगाबाद शहर का विकास नहीं करेंगे, तब तक वे औरंगाबाद का नाम संभाजीनगर नहीं करेंगे। क्या तीन सप्ताह में ही शहर का विकास हो गया ? कौन सा मुख्यमंत्री ठाकरे ने जादू का टूनटूना बजा दिया जिससे शहर का पूरा विकास हुआ। यह सवाल सांसद जलील ने उपस्थित करते हुए साफ कहा कि अपनी कुर्सी और सत्ता जाने के डर से शिवसेना द्वारा दुबारा औरंगाबाद शहर का नाम संभाजीनगर करने का प्रस्ताव लाया जा रहा है। सांसद जलील के अनुसार शिवसेना द्वारा लाया जा रहा यह प्रस्ताव ना कि संभाजी महाराज के इज्जत के लिए, ना उनसे मोहब्बत के लिए और ना ही उनका सम्मान करने के लिए, बल्कि यह प्रस्ताव सिर्फ और सिर्फ सत्ता बचाने के लिए ला रहे है।
एक सवाल के जवाब में सांसद जलील ने बताया कि पहले स्थानीय महानगरपालिका की आम सभा में नामकरण का प्रस्ताव पारित होना चाहिए। उसके बाद यह प्रस्ताव राज्य सरकार के पास जाएगा। राज्य सरकार द्वारा यह प्रस्ताव पारित करने के बाद केंद्र सरकार के पास जाता है। उसके बाद केंद्र सरकार उसे नोटी फाय करता है। महानगरपालिका और राज्य सरकार से यह प्रस्ताव पारित भी हुआ तो केंद्र की बीजेपी सरकार उसमें कई अड़गे डालेगी। क्योंकि, बीजेपी को पता है कि यह प्रस्ताव पारित किया गया तो इसका सारा श्रेय शिवसेना को मिलेंगा। ऐसे में बीजेपी जब महाराष्ट्र में सत्ता में आएगी, तब वह यह प्रस्ताव पारित कर केंद्र को भेजा जाएगा। उसके बाद ही उस पर कुछ निर्णय हो सकता। ऐसे में मुझे नहीं लगता कि शिवसेना को फायदे पहुुंचाने के लिए औरंगाबाद का नाम संभाजीनगर करने के प्रस्ताव को हरी झंडी दिखा पाएगाी।