Sambhajinagar: संजय शिरसाट के पुत्र से जुड़े नीलामी मामले में जांच समाप्त, रिपोर्ट राजस्व विभाग को सौंपी गई
Sambhajinagar Hotel Auction Case: संभाजीनगर में होटल नीलामी विवाद की जांच पूरी हो गई है और रिपोर्ट राजस्व विभाग को सौंप दी गई है, जिसमें अनियमितताओं के आरोपों की जांच की गई।
- Written By: अंकिता पटेल
Maharashtra Politics Controversy( Source: Social Media )
Maharashtra Politics Controversy: छत्रपति संभाजीनगर जिले के पालक मंत्री संजय शिरसाट के पुत्र से जुड़े होटल खरीद नीलामी प्रकरण की जांच अब पूरी हो गई है। राज्य सरकार द्वारा गठित समिति ने संपूर्ण जांच पूरी कर अपनी रिपोर्ट हाल ही में राजस्व विभाग को सौंप दी है।
यह जानकारी विश्वसनीय सूत्रों से मिली है। राज्यभर में चर्चित इस नीलामी प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के आरोप विपक्षी दलों द्वारा लगाए गए थे।
इसके बाद राज्य सरकार ने मामले की गहन जांच के लिए विभागीय आयुक्त की अध्यक्षता में एक समिति गठित की थी। जिला प्रशासन ने मई 2025 में धनदा कॉर्पोरेशन की दो संपत्तियों का नीलाम किया था।
सम्बंधित ख़बरें
छत्रपति संभाजीनगर की हर संपत्ति को मिलेगा अलग पीआर कार्ड, ड्रोन सर्वे से बनेगा डिजिटल रिकॉर्ड
मुंबई मेट्रो वन को मिली बड़ी संजीवनी: एनएआरसीएल के साथ कर्ज समझौता, दिवाला प्रक्रिया भी होगी वापस
महाराष्ट्र के जल जीवन मिशन पर CAG रिपोर्ट, नल कनेक्शन, वित्तीय प्रबंधन और क्रियान्वयन पर उठे सवाल
मुंबई–पुणे रेल यात्रियों के लिए एसटी की बड़ी राहत: 200 अतिरिक्त बस फेरियां शुरू, परिवहन मंत्री सरनाईक का फैसला
इसमें रेलवे स्टेशन रोड पर स्थित एक होटल और उसके पास की खाली जमीन शामिल थी। इस नीलामी में पालकमंत्री संजय शिरसाट के पुत्र सिद्धांत शिरसाट को कंपनी “सिद्धांत मटेरियल प्रोक्योरमेंट एंड सप्लाइज ने 64 करोड़ 83 लाख रुपये की सबसे ऊंची बोली लगाई थी।
विवाद बढ़ने के बाद सिद्धांत शिरसाट को नीलामी से हटाया
मामले के बढ़ते विवाद के बाद मंत्री संजय शिरसाट ने अपने पुत्र को इस नीलामी प्रक्रिया से पीछे हटने के निर्देश दिए। यह मुद्दा राज्य विधानसभा में भी उठा था।
यह भी पढ़ें:-Chhatrapati Sambhajinagar: जलापूर्ति योजना में खामी, टेस्टिंग में खुली पोल, पाइपलाइन लीकेज से बड़ा नुकसान
उस समय मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने का आश्वासन दिया था। प्रारंभ में विभागीय आयुक्त ने इस नीलामी प्रक्रिया की जांच के लिए तत्कालीन जिलाधिकारी दिलीप स्वामी की अध्यक्षता में समिति नियुक्त की थी, बाद में इसमें बदलाव करते हुए जांच की जिम्मेदारी स्वयं विभागीय आयुक्त जितेंद्र पापलकर को सौंप दी गई।
