Weekly Market Closure ( Source: Social Media )
Sambhajinagar Weekly Market Closure: छत्रपति संभाजीनगर शहर के चिकलथाना, जाफर गेट, शाहनूरमियां दरगाह क्षेत्र के पीर बाजार में साप्ताहिक बाजार बंद करने के मनपा के प्रस्ताव पर सांसद डॉ. कल्याण काले ने कड़ी नाराजगी जताते हुए जिलाधिकारी व मनपा आयुक्त को ज्ञापन सौंपकर कहा कि इस निर्णय से हजारों किसानों के अलावा लघु व्यापारी व आम नागरिक प्रभावित होंगे, ऐसे में इस फैसले पर पुनर्विचार करने की सलाह देते हुए कहा कि प्रशासन को चाहिए कि वह सभी पहलुओं का सघन अध्ययन करने के बाद सोच-समझकर संवेदनशील व संतुलित फैसला लें।
सांसद डॉ. काले ने पत्र में कहा कि यह साप्ताहिक बाजार सिर्फ व्यापारिक केंद्र नहीं, बल्कि शहर व ग्रामीण अर्थव्यवस्था को जोड़ने वाले अहम कड़ी हैं। ग्रामीण क्षेत्र के किसान अपना कृषि माल सीधे ग्राहकों तक पहुंचाने इन्हीं बाजारों पर आश्रित रहते हैं। कहा कि यदि यह बाजार बंद हुए, तो इसका सीधा असर किसानों की आय व जीविकोपार्जन पर होगा।
डॉ. काले ने कहा कि सैकड़ों लघु व चलित विक्रेता भी इन बाजारों आश्रित हैं। यही नहीं, आम नागरिकों पर को भी कम दामों में ताजी सब्जियां व जीवनावश्यक वस्तुएं मिलती हैं। साप्ताहिक बाजार बंद होने से उनकी परेशानी व जेब खाली होगी।
सांसद डॉ. कल्याण काले ने बाजार बंद करने के निर्णय पर तत्काल पुनर्विचार करने, यातायात व सुरक्षा की समस्याओं पर शावत उपाययोजना करते हुए बाजार यथावत रखने का आग्रह किया। कहा कि यदि स्थांनातरण का मौका आता है, तो सभी सुविधाएं बहाल कर वैकल्पिक जगह उपलब्ध कराने, किसानों, व्यापारी व नागरिक प्रतिनिधियों से चर्चा कर लोकहितकारी निर्णय लिया जाए।
बाजार में व्यापारी एक-दूसरे को फोन मिलाते रहे और हर चेहरे पर एक ही सवाल- अब क्या होगा? वजह है भीड़भाड़ वाले बाजारों को कहीं और शिफ्ट करने की जरूरत है। बस यही बात व्यापारियों के दिल में आग की तरह फैल गई और मार्केट में दहशत का माहौल बन गया है।
शिफ्टिंग की बात कहकर मार्केट में अफवाहों का बाजार गर्म कर दिया, व्यापारी डरे हुए हैं, उनका रोजगार दांव पर लगा है। लोगों का कहना है कि बाजार को शिफ्ट करने की कोई जरूरत नहीं है।
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ये बाजार शान है, यहां की रौनक ही इसकी पहचान है। बाजार के कारोबारियों का सुझाव है कि व्यापारियों को राहत मिले और ग्राहकों को भी आसानी हो। शिफ्टिंग से क्या हासिल होगा? हमारा कारोबार, हमारी जिंदगी यहां बसी हैं। इसे उजाड़ने की बात कौन बर्दाश्त करेगा।