Sambhajinagar Municipal Corporation: 3 हजार में बन रहा फर्जी जन्म प्रमाणपत्र! संभाजीनगर में बड़ा रैकेट उजागर
Sambhajinagar Municipal Corporation:संभाजीनगर में फर्जी जन्म, मृत्यु और विवाह प्रमाणपत्र बनाने वाले गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। बारकोड स्कैन में नामों की गड़बड़ी सामने आई हैं।
- Written By: केतकी मोडक
(प्रतीकात्मक तस्वीर सोर्स: सोशल मीडिया)
Corruption in Sambhajinagar Municipal Corporation: छत्रपति संभाजीनगर शहर में महापालिका के नाम पर फर्जी जन्म, मृत्यु और विवाह प्रमाणपत्र बनाने वाले गिरोह के सक्रिय होने का गंभीर मामला सामने आया है। भाजपा नगरसेवक राजगौरव वानखेडे ने सोमवार को आयोजित स्थायी समिति की बैठक में एक छात्रा का फर्जी जन्म प्रमाणपत्र प्रस्तुत कर इस पूरे रैकेट का पर्दाफाश किया।
बारकोड स्कैन करने पर प्रमाणपत्र पर दर्ज नाम और ऑनलाइन प्रणाली में दर्ज नाम अलग-अलग पाए जाने से प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस खुलासे के बाद बैठक में तीखी चर्चा हुई और मामले की गहराई से जांच के आदेश सभापति अनिल मकरिये ने प्रशासन को दिए।
बारकोड स्कैन करने पर सामने आया अलग नाम
बैठक में वानखेडे ने कक्षा आठवीं में पढ़ने वाली एक छात्रा के दो जन्म प्रमाणपत्र प्रस्तुत किए। पहले प्रमाणपत्र पर बारकोड नहीं था, जिसे स्कूल ने अस्वीकार कर दिया। इसके बाद अभिभावकों ने बारकोड युक्त दूसरा प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया। लेकिन जब उस पर मौजूद बारकोड को स्कैन किया गया, तो ऑनलाइन प्रणाली में किसी अन्य बच्चे का नाम दिखाई दिया। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी डॉ. पारस मंडलेचा ने बैठक में बताया कि वार्ड कार्यालय से यह प्रमाण पत्र वितरित किए जाते है।
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इस मुद्दे पर जारी चर्चा में नगरसेवक अमित भुईगल, एमआईएम की अलमास अमजद चाचू, अजहर पटेल, ने हिस्सा लेकर प्रशासन द्वारा इन प्रमाणपत्रों को देने के लिए शहर के नागरिकों की जा रही प्रताडना पर कड़ी नाराजगी जतायी।
मकरिये ने 7 दिनों में प्रमाणपत्र देने के दिए सख्त निर्देश
छत्रपति संभाजीनगर समिति के सभापति अनिल मकरिये ने प्रशासन को निर्देश दिए कि आवेदन के सात दिनों के भीतर जन्म, मृत्यु और विवाह प्रमाणपत्र जारी किए जाएं। साथ ही इस पूरे मामले की विस्तृत जांच कर अगल बैठक में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए। अतिरिक्त आयुक्त रणजित पाटील ने बताया कि सेवा गारंटी कानून के तहत निर्धारित समय सीमा में प्रमाणपत्र जारी न करने पर संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई का प्रावधान है।
इस पूरे मामले ने मनपा की कार्यप्रणाली और दस्तावेजों की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह खड़े कर दिए है। फर्जी प्रमाणपत्रों के माध्यम से सरकारी योजनाओं के दुरुपयोग की आशंका भी व्यक्त की गई है। बैठक में यह स्पष्ट हुआ कि यदि समय रहते इस रैकेट पर रोक नहीं लगाई गई, तो इसके दूरगामी परिणाम सामने आ सकते हैं।
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विद्यार्थियों को हो रही बड़ी परेशानी
- वानखेडे ने बताया कि शहर में बाहर से आए मजदूरों, विशेषकर गन्ना कटाई करने वाले श्रमिकों के बच्चों को समय पर जन्म प्रमाणपत्र नहीं मिल पाता।
- उनके वार्ड में ही 12 से 14 विद्यार्थियों को स्कूल सत्यापन के दौरान परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जन्म प्रमाणपत्र के अभाव में बच्चों के प्रवेश और शिक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
- नगरसेवक सुरेंद्र कुलकर्णी ने बताया कि शहर के अनाथालयों में रहने वाले बच्चों के दत्तक प्रक्रिया के दौरान जन्म प्रमाणपत्र प्राप्त करने में संस्थाओं को गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
- ऐसे मामलों में नियमों को सरल बनाकर बच्चों को राहत देने की मांग की गई। वंचित बहुजन आघाड़ी के सदस्य अमित भुईगल तथा नगरसेविका एड।
- माधुरी अदवंत ने भी इस प्रकरण की गहन जांच कर संबंधित गिरोह का पता लगाने और कठोर कार्रवाई करने की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि विवाह प्रमाणपत्रों में भी इसी प्रकार के अनियमितता होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
- नगरसेवक सचिन खैरे ने कहा कि समय पर साधारण जन्म प्रमाणपत्र तक उपलब्ध न होना अत्यंत चिंताजनक स्थिति है।
