संभाजीनगर में बनेगी मराठवाड़ा की पहली विरासत संरक्षण प्रयोगशाला, ग्रंथों को मिलेगा जीवनदान
Sambhajinagar Heritage Conservation: संभाजीनगर के शिवाजी महाराज पुरावस्तु संग्रहालय में महाराष्ट्र की पहली संरक्षण प्रयोगशाला स्थापित होगी। INTACH व महानगर पालिका के बीच करार हुआ।
- Written By: अंकिता पटेल
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Sambhajinagar Museum Hindi News: छत्रपति संभाजीनगर शहर और मराठवाड़ा क्षेत्र में उपलब्ध ऐतिहासिक वस्तुएं, हस्तलिखित दस्तावेज, चित्रकला और प्राचीन ग्रंथों का वैज्ञानिक पद्धति से संरक्षण अब स्थानीय स्तर पर ही संभव होने जा रहा है। छत्रपति शिवाजी महाराज पुरावस्तु संग्रहालय परिसर में संरक्षण प्रयोगशाला स्थापित करने के लिए इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज और महानगर पालिका के बीच बीते दिन शनिवार, 7 फरवरी को सामंजस्य करार संपन्न हुआ।
महानगर पालिका आयुक्त व प्रशासक जी. श्रीकांत व इन्टैक संभाजीनगर चैप्टर की समन्वयक व वरिष्ठ वास्तुविशारद माया वैद्य ने समझौता पत्र पर हस्ताक्षर किए। प्राप्त जानकारी के अनुसार, मराठवाड़ा क्षेत्र में हजारों की संख्या में ऐतिहासिक धरोहरें उपलब्ध हैं।
हकीकत यह है कि वैज्ञानिक संरक्षण की सुविधाएं नहीं होने के चलते अनेक अमूल्य वस्तुओं के नष्ट होने का खतरा बना हुआ है। इन्टैक की देशभर में 5 संरक्षण प्रयोगशालाएं कार्यरत हैं। महाराष्ट्र में यह अपनी तरह की पहली प्रयोगशाला छत्रपति संभाजीनगर में स्थापित की जा रही है।
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हाल ही में आयोजित बैठक में प्रस्तावित प्रयोगशाला की संरचना, कार्यप्रणाली और भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तृत चर्चा की गई थी। बैठक में सांसद व पूर्व केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री डॉ. भागवत कराड़, महापौर पद के भाजपा प्रत्याशी नगरसेवक समीर राजूरकर, इन्टैक के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंह ठाकुर, राज्य समन्वयक मुकुंद भोगले, संग्रहालय के मानद संचालक श्रीप्रकाश पुरवार संग अन्य सदस्य उपस्थित थे।
कार्यक्रम में ये रहे मौजूद
सामंजस्य करार के औपचारिक कार्यक्रम में सह समन्वयक एड। स्वप्निल जोशी, वास्तुविशारद स्नेहा बक्षी, कार्यकारी समिति सदस्य आदित्य वाघमारे, अमित देशपांडे और चागेश्री देसाई उपस्थित थे।
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दस्तावेजों की वैज्ञानिक सुरक्षा
अधिकारियों के अनुसार, यह प्रयोगशाला न केवल स्थानीय धरोहरों के संरक्षण में सहायक होगी, बल्कि पूरे मराठवाड़ा क्षेत्र के लिए एक प्रमुख विरासत संरक्षण केंद्र के रूप में विकसित होगी। इन्टैक के विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में नागरिक भी अपने पास उपलब्ध पुरावस्तुओं व दस्तावेजों का वैज्ञानिक संरक्षण करवा सकेंगे।
