प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Maharashtra Politics Heritage Issue: छत्रपति संभाजीनगर अहिल्यादेवी होलकर ने सिर्फ महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश संग कई राज्यों में घाट, बावड़ियां बनवाई व कई मंदिरों का पुनर्निर्माण कराया जिसमें वाराणसी स्थित मणिकर्णिका घाट भी शामिल है। मणिकर्णिका घाट पूरे हिंदू समाज के लिए अत्यंत पवित्र व ऐतिहासिक स्थल हैं।
यदि यह घाट भाजपा ने तोड़ा है, तो इस पाप का प्रायश्चित करना चाहिए, यह सलाह विधान परिषद में विपक्ष के पूर्व नेता अंबादास दानवे ने दी। भाजपा व शिवसेना में प्रवेश को भी उन्होंने सिरे से नकार दिया।
सरकार की ओर से वाराणसी में होलकर की ओर से निर्मित मणिकर्णिका घाट तोड़े जाने की चर्चा के बीच शहर स्थित कोकणवाड़ी चौक स्थित अहिल्यादेवी होलकर स्मारक के सामने सर्वदलीय मौन धरना दिया गया, तब दानवे बोल रहे थे।
मौन आंदोलन में शिवसेना संग कांग्रेस, राकांपा, वंचित बहुजन आघाड़ी, मनसे, प्रहार संगठन व कम्युनिस्ट पार्टी के पदाधिकारी व कार्यकर्ताओं ने मुंह पर काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराया।
दानवे ने होलकर की ओर से मणिकर्णिका घाट पर भाजपा सरकार के बुलडोजर चलाने का विरोध करते हुए कहा कि उसका हिंदुत्व केवल नाम का है व घटना से उसका दोहरा चरित्र सामने आया है। घाट के साथ ही होलकर की मूर्ति भी नष्ट करना पीड़ादायक है। आंदोलन में सभी समान विचारधारा वाले दल साथ आए हैं।
लोकसभा, विधानसभा, नगरपालिका, नगरपंचायत के बाद मनपा चुनाव में उबाठा को मिली विफलता के बाद दानवे के अन्य दलों में प्रवेश करने की अटकलों को निराचार बताते हुए दानवे ने कहा कि वे बाळासाहेब ठाकरे के कट्टर शिवसैनिक है।
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पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे के सिवा वे किसके पिछलग्गू नहीं बनेंगे, कहा कि उन्हें किसी की सलाह की जरूरत नहीं है और वे पार्टी का काम कर रहे। आजीवन शिवसेना का ही काम करने की प्रतिबद्धता दशाई, दानवे के नॉट रिचेबल होने की चर्चाओं से सियायत में हड़कंप मच गया था।