छत्रपति संभाजीनगर में बारिश का कहर: गोदावरी में बाढ़, जायकवाड़ी के आपातकालीन दरवाजे खुले

छत्रपति संभाजीनगर में तेज बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है और गोदावरी व खेलना नदियों में बाढ़ आ गई है, जबकि जायकवाड़ी बांध के आपातकालीन दरवाजे खोले गए हैं।
Rain havoc in Chhatrapati Sambhajinagar (pic credit; social media)
Rain havoc in Chhatrapati Sambhajinagar (pic credit; social media)
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Heavy Rain Chhatrapati Sambhajinagar: छत्रपति संभाजीनगर में शनिवार और रविवार को हुई तेज बारिश से जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। भारी बारिश के चलते जायकवाड़ी बांध के आपातकालीन एक दरवाजे समेत सभी 27 दरवाजे पांच फुट तक खोल दिए गए। गोदावरी नदी में 1,13,184 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है, जिससे नदी किनारे रहने वाले नागरिकों और खेतों में फसल उगाने वाले किसानों को सतर्क रहने की चेतावनी दी गई।

पैठण तहसील में लगातार 14 घंटे बरसात से गोदावरी पट्टा लगभग 30 किलोमीटर लंबा जलमग्न हो गया। इससे सैकड़ों हेक्टेयर फसलें प्रभावित हुईं और पाझर तालाबों के ओवरफ्लो से लाखों लीटर पानी बह गया। स्थानीय सूत्रों ने बताया कि ट्रेनेज और निचले इलाकों का पानी लोहगांव स्थित गुट नं 85/86 में जमा होकर पुराने तालाब का रूप ले लिया।

सिल्लोड तहसील में खेलना नदी का जलस्तर बढ़ने से कैलगांव-आमठाना रोड पर स्थित पुल पूरी तरह जलमग्न हो गया। इस वजह से करीब 5 घंटे तक यातायात प्रभावित रहा। ग्रामीणों ने कहा कि पुल की ऊंचाई कम करने और नया पुल बनाने में देरी होती रही तो लोक निर्माण विभाग के खिलाफ आंदोलन किया जाएगा।

तालाबों के फूटने से पेयजल की समस्या कुछ हद तक हल हुई है, लेकिन देखभाल न होने से जल संकट गहराने का खतरा बना हुआ है। लामगव्हाण और तोंडोली मार्ग पर तालाब का पानी ग्रामीण इलाकों और स्कूलों तक पहुंच गया, जिससे व्यापक नुकसान हुआ।

तेज बारिश और बाढ़ की स्थिति का जायजा लेने तहसीलदार ज्योति पवार, मंडल अधिकारी राजाराम ससाणे, पटवारी मारोति दंडे और प्रभारी प्रापं अधिकारी सुहास पाटील ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। सिंचाई और मृदा संधारण महामंडल के अधिकारी भी मौके पर मौजूद रहे।

विशेषज्ञों ने चेताया है कि यदि जलाशयों की मरम्मत और नदियों के किनारे सुरक्षा उपाय समय पर नहीं किए गए तो भविष्य में और बड़े नुकसान की संभावना है। नागरिकों को अलर्ट रहने और नदी किनारे न जाने की सलाह दी गई है।

बारिश और बाढ़ के चलते फसलें और स्थानीय संपत्ति प्रभावित हुई हैं, लेकिन प्रशासन सक्रियता दिखा रहा है। प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य तेज़ी से चल रहा है।

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