महावितरण ने रचा इतिहास, सौर कृषिपंप’योजना दर्ज हुई गिनीज बुक में, CM फडणवीस की उपस्थिति मुख्य
Chhatrapati Sambhajinagar News: ‘मांगेगा उसे सौर कृषिपंप’ योजना के तहत एक महीने में 45,911 सौर पंप लगाकर विश्व रिकॉर्ड बनाया। गिनीज बुक ने इसे दर्ज किया। प्रमाणपत्र समारोह 5 दिसंबर को होगा।
- Written By: अंकिता पटेल
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सोशल मीडिया )
Chhatrapati Sambhajinagar Agricultural Pump Scheme : छत्रपति संभाजीनगर ‘मांगेगा उसे सौर कृषिपंप’ योजना में महाराष्ट्र ने इतिहास रच दिया है। महावितरण ने एक ही महीने में 45,911 सौर कृषि पंप स्थापित कर विश्व रिकॉर्ड बनाया है।
इस उपलब्धि की औपचारिक पंजीकरण गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉ में हो चुकी है। प्रमाणपत्र प्रदान समारोह 5 दिसंबर 2025 को सुबह 10 बजे छत्रपति संभाजीनगर के शेंद्रा एमआईडीसी स्थित ऑरिक सिटी मैदान में आयोजित किया गया है। इस समारोह में राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस मुख्य अतिथि होंगे।
कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री अजित पवार, अपरंपरागत ऊर्जा मंत्री अतुल सावे, जिले के पालक मंत्री संजय शिरसाट, ऊर्जा राज्यमंत्री मेघना बोर्डीकर, अपर मुख्य सचिव ऊर्जा आभा शुक्ला तथा महावितरण के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक लोकेश चंद्र उपस्थित रहेंगे।
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राज्य में कुल साढ़े दस लाख सौर कृषि पंप लगाने का लक्ष्य
योजना के तहत किसानों को केवल 10 प्रतिशत राशि जमा कर सौर पैनल और कृषिपंप का पूरा सेट उपलब्ध कराया जा रहा है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस योजना के प्रभावी कार्यान्वयन पर विशेष जोर दिया है। पूरे देश में महाराष्ट्र ने सर्वाधिक सौर पंप स्थापित करने का नया कीर्तिमान दर्ज किया है। राज्य में कुल साढ़े दस लाख सौर कृषि पंप लगाने का लक्ष्य रखा गया है। इससे उन किसानों की समस्या समाप्त होगी जो भुगतान के बावजूद विद्युत कनेक्शन की प्रतीक्षा कर रहे थे।
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महावितरण का ऑनलाइन पोर्टल विकसित
महावितरण ने योजना के लिए अलग ऑनलाइन पोर्टल विकसित किया है। किसान द्वारा ऑनलाइन आवेदन करने के बाद महावितरण उसे मंजूरी देता है इसके बाद किसान अपना हिस्सा जमा करता है और पंप स्थापित करने के लिए अधिकृत एजेंसी का चयन किया जाता है।
महावितरण, एजेंसी और किसान संयुक्त रूप से स्थल निरीक्षण करते हैं, उसके बाद कार्यादेश जारी कर खेत में सौर पंप लगाया जाता है। एजेंसी पर भविष्य में रखरखाव और मरम्मत की भी पूर्ण जिम्मेदारी रहती है। सौर पैनलों से 25 वर्ष तक बिजली उत्पादन होता है, जिससे किसानों को लंबे समय तक पंप के लिए बिजली बिल नहीं देना पड़ता।
